Edited By Jyoti M, Updated: 09 Apr, 2026 03:01 PM

हिमाचल प्रदेश में पिछले पांच दिनों से जारी भारी बारिश ने राज्य में मॉनसून जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। इस बेमौसम बरसात के कारण चंबा में पुल गिरने की घटना के बाद अब कुल्लू और मंडी जिलों से भी भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं। कुल्लू जिले के बंदरोल इलाके...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में पिछले पांच दिनों से जारी भारी बारिश ने राज्य में मॉनसून जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। इस बेमौसम बरसात के कारण चंबा में पुल गिरने की घटना के बाद अब कुल्लू और मंडी जिलों से भी भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं। कुल्लू जिले के बंदरोल इलाके में ब्यास नदी के किनारे भूस्खलन होने से हड़कंप मच गया है।
मिट्टी खिसकने के कारण नदी के तट पर स्थित एक आलीशान होटल और उसके पास बने एक अन्य भवन का हिस्सा ढह गया है। करोड़ों की लागत से बने इस होटल पर अब गिरने का खतरा मंडरा रहा है, जिसे देखते हुए स्थानीय लोग भवनों को खाली करने की सलाह दे रहे हैं।
सड़कों और पुलों को पहुंचा भारी नुकसान
पहाड़ों पर हो रही इस बारिश ने यातायात व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कुल्लू और मनाली को जोड़ने वाले लेफ्ट बैंक हाईवे का एक हिस्सा मनाली के अलेऊ के पास धंस गया है। वहीं, मंडी जिले में चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर स्थित 'जागर नाला' के पास बना एक डंगा (सुरक्षा दीवार) बुधवार को दोबारा ढह गया। गौरतलब है कि इसे हाल ही में कंपनी द्वारा मरम्मत करके बनाया गया था, लेकिन यह फिर से बारिश का दबाव नहीं झेल सका। इस डंगे के गिरने से लगभग 30 मीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है और यदि दीवार का बचा हुआ हिस्सा भी गिरता है, तो पास स्थित आधा दर्जन घरों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
अटल टनल पर बर्फबारी और कड़ाके की ठंड
मैदानी इलाकों में बारिश के साथ-साथ ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी का दौर भी शुरू हो गया है। रोहतांग की अटल टनल के पास ताज़ा बर्फबारी होने की वजह से सड़कों पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे ड्राइवरों को सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। राज्य में लगातार हो रही इस बारिश और बर्फबारी ने अप्रैल के महीने में ही दिसंबर-जनवरी जैसी ठंड का अहसास करा दिया है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
हालांकि, गुरुवार को मौसम में थोड़ा सुधार देखा गया और धूप खिली है। मौसम विभाग ने राहत भरी खबर देते हुए अनुमान जताया है कि आने वाले अगले पांच दिनों तक मौसम साफ बना रहेगा। इससे प्रशासन को नुकसान का जायजा लेने और प्रभावित सड़कों की मरम्मत करने में मदद मिलेगी।