Edited By Kuldeep, Updated: 29 Jan, 2026 11:07 PM

कहते हैं कि जब हौसले बुलंद हों और इरादे नेक तो कुदरत की चुनौतियां भी घुटने टेक देती हैं। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की दुर्गम पट्टन घाटी में कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम और 108 एम्बुलैंस के कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में...
मनाली (सोनू): कहते हैं कि जब हौसले बुलंद हों और इरादे नेक तो कुदरत की चुनौतियां भी घुटने टेक देती हैं। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की दुर्गम पट्टन घाटी में कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम और 108 एम्बुलैंस के कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक 57 वर्षीय व्यक्ति को नया जीवन दिया। बर्फबारी और जमा देने वाली ठंड के बीच लिंडुर गांव के परमजीत के लिए यह टीम किसी 'फरिश्ते' से कम साबित नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार लिंडुर गांव के निवासी परमजीत (57) के सिर पर गंभीर चोट आई थी। इस कारण उनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। आनन-फानन में उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फूडा लाया गया, वहां तैनात डॉ. पुजारा ने प्राथमिक उपचार के बाद पाया कि मरीज की हालत अत्यंत चिंताजनक है और उन्हें तुरंत विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता है। डॉ. पुजारा ने बिना समय गंवाए उन्हें बेहतर इलाज के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू रैफर कर दिया,लेकिन चुनौती अभी शुरू हुई थी। घाटी में भारी बर्फबारी के कारण सड़कें सफेद चादर से ढकी हुई थीं और चारों तरफ फिसलन का साम्राज्य था। ऐसी स्थिति में वाहन चलाना न केवल कठिन था, बल्कि जानलेवा भी हो सकता था।
108 एम्बुलैंस के पायलट सुरेश कुमार और एमरजैंसी मैडीकल टैक्नीशियन लक्ष्मी चंद ने हिम्मत दिखाई। पायलट सुरेश कुमार ने बर्फ की चुनौतियों को दरकिनार करते हुए एम्बुलैंस की स्टेयरिंग थामी। उनके साथ लक्ष्मी चंद ने एम्बुलैंस में मरीज को लगातार मैडीकल सपोर्ट देना जारी रखा। बर्फ बीच एम्बुलैंस किसी उम्मीद की किरण की तरह दौड़ रही थी। पायलट सुरेश कुमार की सूझबूझ और ड्राइविंग कौशल ने यह सुनिश्चित किया कि एम्बुलैंस बिना किसी बड़े अवरोध के आगे बढ़ती रहे।