Edited By Vijay, Updated: 17 Mar, 2026 04:46 PM

कांगड़ा के सिविल अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा अब तूल पकड़ने लगा है। अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए सोसायटी के सदस्य अशोक हिमाचली ने कमान संभाली है।
कांगड़ा (किशोर): कांगड़ा के सिविल अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा अब तूल पकड़ने लगा है। अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए सोसायटी के सदस्य अशोक हिमाचली ने कमान संभाली है। उन्होंने यह अहम मुद्दा सीधे हिमाचल प्रदेश के मुख्य स्वास्थ्य सचिव के समक्ष उठाया है। अशोक हिमाचली ने अस्पताल में अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है।
सिविल अस्पताल कांगड़ा पूरे इलाके के हजारों लोगों के लिए लाइफलाइन है, लेकिन इस पर मरीजों का दबाव क्षमता से कहीं अधिक बढ़ गया है। अशोक हिमाचली द्वारा सांझा किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में अस्पताल की ओपीडी में 1 लाख 11 हजार 235 मरीजों ने अपना इलाज करवाया। वहीं, गंभीर बीमारियों के चलते 8 हजार 357 मरीजों को आईपीडी में भर्ती करना पड़ा। इसके अलावा, अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में रोजाना 80 से 100 एक्स-रे किए जा रहे हैं। इतने भारी दबाव के बावजूद अस्पताल सीमित स्टाफ के सहारे चल रहा है।
नई एक्स-रे, यूएसजी मशीन और मिनिस्टीरियल स्टाफ की मांग
बैठक में अशोक हिमाचली ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक और चिकित्सीय कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए अस्पताल में मिनिस्टीरियल स्टाफ के अतिरिक्त पद सृजित करना अब बेहद जरूरी हो गया है। इसके साथ ही मरीजों की सुविधा के लिए एक नई एक्स-रे मशीन और बेसिक अल्ट्रासाऊंड मशीन खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है। इन सभी आवश्यक उपकरणों और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 17 लाख 40 हजार रुपए का बजट निर्धारित कर सरकार से इसकी मांग की गई है।
जल्द मुख्यमंत्री के दरबार पहुंचेगा मामला
अशोक हिमाचली ने बताया कि स्वास्थ्य सचिव के बाद अब वह इस गंभीर मसले को लेकर शीघ्र ही प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करेंगे। उनके समक्ष यह पूरा प्रस्ताव रखा जाएगा ताकि अस्पताल को जल्द से जल्द बजट और स्टाफ मिल सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से अस्पताल की सर्जिकल और डायग्नोस्टिक (जांच) सेवाओं में बड़ा सुधार होगा। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों को अपने ही इलाके में बेहतर और त्वरित इलाज मिल सकेगा।
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