Edited By Swati Sharma, Updated: 30 Mar, 2026 01:01 PM

Shimla News : हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र से पारिवारिक विवादों से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां दो अलग-अलग वैवाहिक मामलों में अदालत ने आपसी सहमति के आधार पर तलाक को मंजूरी दी है। खास बात यह है कि इन मामलों में...
Shimla News : हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र से पारिवारिक विवादों से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां दो अलग-अलग वैवाहिक मामलों में अदालत ने आपसी सहमति के आधार पर तलाक को मंजूरी दी है। खास बात यह है कि इन मामलों में पत्नियों की उम्र 75 वर्ष बताई गई है, जिसने इस घटनाक्रम को चर्चा का विषय बना दिया है।
1990 में हुआ था दोनों का विवाह
जानकारी के अनुसार, इन दोनों मामलों में पति-पत्नी की ओर से अदालत में संयुक्त याचिकाएं दाखिल की गई थीं। सभी पक्षों की सहमति और शपथ पत्रों के आधार पर अदालत ने निर्णय सुनाते हुए वैवाहिक संबंध समाप्त करने की अनुमति दे दी। इन दोनों का विवाह वर्ष 1990 में हुआ था। पिछले 15 वर्षों (2010) से दोनों के बीच अनबन चल रही थी और वे अलग रह रहे थे। आपसी सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम रहने के बाद उन्होंने कानूनी रास्ता चुना। चूंकि इस दंपत्ति की कोई संतान नहीं है, अदालत में यह समझौता हुआ कि पति अपनी मासिक पेंशन में से 5,000 रुपये हर महीने पूर्व पत्नी को भरण-पोषण के लिए देगा। इसके अलावा, बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च भी पति ही वहन करेगा।
अपने पिता के साथ रहेंगे तीनों बच्चे
वहीं, दूसरे मामले में 75 वर्षीय पत्नी और 39 वर्षीय पति ने अलग होने का फैसला किया। इस दंपत्ति का विवाह वर्ष 2008 में हुआ था। इनके तीन बच्चे हैं। समझौते के अनुसार, तीनों बच्चे अपने पिता के साथ रहेंगे। हालांकि, पिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि मां जब चाहे अपने बच्चों से मिल सके। जून 2021 से दोनों के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे, जिसके बाद उन्होंने साथ रहने की अनिच्छा जाहिर करते हुए कोर्ट में हलफनामा पेश किया। अदालत ने दोनों मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए महिलाओं के रहने और बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स और कोर्ट में जमा शपथ पत्रों के अनुसार, पतियों को अपनी तलाकशुदा पत्नियों को रहने के लिए अलग कमरा, रसोई और वॉशरूम की सुविधा देनी होगी। वहीं, इन दोनों मामलों ने सामाजिक और कानूनी हलकों में चर्चा को जन्म दिया है, जहां आपसी सहमति और सम्मानजनक शर्तों के साथ विवाह समाप्त करने को एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
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