Edited By Swati Sharma, Updated: 09 May, 2026 10:24 AM

Shimla News : नशीले पदार्थ से जुड़े अपराधों में हिमाचल प्रदेश वर्ष 2024 में देश में दूसरे स्थान पर रहा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्रति एक लाख अपराध की दर 17.2 रही। वहीं, पड़ोसी राज्य पंजाब...
Shimla News : नशीले पदार्थ से जुड़े अपराधों में हिमाचल प्रदेश वर्ष 2024 में देश में दूसरे स्थान पर रहा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्रति एक लाख अपराध की दर 17.2 रही। वहीं, पड़ोसी राज्य पंजाब प्रति लाख आबादी पर 19.6 मामलों की अपराध दर के साथ इस सूची में शीर्ष पर रहा।
एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चला है कि हिमाचल प्रदेश ने 2024 में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 1,715 मामले दर्ज किए, जिसका अर्थ है प्रति लाख आबादी पर 22.8 की अपराध दर, जो 7.8 की राष्ट्रीय औसत अपराध दर से लगभग तीन गुना है। यह देश में चौथी सबसे अधिक एनडीपीएस अपराध दर है। इस श्रेणी में केरल 27,149 मामलों और प्रति लाख आबादी पर 75.5 मामलों की अपराध दर के साथ देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद पंजाब (8,973 मामले, 29 की दर) और मिजोरम (340 मामले, 27 की दर) का स्थान है। हिमाचल में दर्ज कुल एनडीपीएस मामलों में से 423 व्यक्तिगत उपभोग के लिए नशीले पदार्थ रखने से संबंधित थे, जबकि 1,292 मामले तस्करी के उद्देश्य से नशीले पदार्थ रखने से जुड़े थे। एनडीपीएस अधिनियम के तहत तस्करी के लिए नशीले पदार्थ रखने से संबंधित अपराधों की दर में हिमाचल प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। यहां इसकी अपराध दर प्रति लाख जनसंख्या पर 17.2 मामले है, जो राष्ट्रीय औसत से छह गुना अधिक है। वर्ष 2023 में हिमाचल ने 2,146 एनडीपीएस मामले दर्ज किए थे, जिसमें अपराध दर 28.7 थी, जो केरल और पंजाब के बाद देश में तीसरी सबसे अधिक थी। इस प्रकार, 2024 में मामलों की संख्या में 20.1 प्रतिशत की गिरावट आई है। वर्ष 2023 में, 547 मामले व्यक्तिगत उपभोग के लिए और 1,599 मामले तस्करी के लिए नशीले पदार्थ रखने से जुड़े थे।
वर्ष 2023 में तस्करी के उद्देश्य से नशीले पदार्थ रखने के मामलों की अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 21.4 थी, जो देश में दूसरी सबसे अधिक थी। तब पंजाब 25.3 की अपराध दर के साथ आगे था। एनसीआरबी के आंकड़ों ने इस पहाड़ी राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और तस्करी की बढ़ती चुनौती को उजागर किया है, जहां कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में मादक पदार्थ विरोधी अभियानों को तेज किया है। हिमाचल प्रदेश के पुलिस अधिकारियों ने कई जिलों में युवाओं के बीच सिंथेटिक दवाओं, विशेष रूप से 'चिट्टा' के बढ़ते प्रसार पर बार-बार चिंता व्यक्त की है।
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