'2 बार आपदाओं से प्रभावित हुआ राज्य...फिर भी नहीं सीखा कोई सबक', हाईकोर्ट की सरकार को कड़ी फटकार

Edited By Vijay, Updated: 25 Apr, 2026 11:24 AM

highcourt sternly reprimand the government

प्रदेश हाईकोर्ट ने आपदा राहत के लिए बड़ी कंपनियों से औसत मुनाफे की 2 फीसदी राशि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी नीति के तहत खर्च न करवाने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने आपदा राहत के लिए बड़ी कंपनियों से औसत मुनाफे की 2 फीसदी राशि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी नीति के तहत खर्च न करवाने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इस तथ्य के बावजूद कि यह राज्य वर्ष 2023-25 में एक बार नहीं, बल्कि 2 बार आपदाओं से प्रभावित हुआ है, इस प्रकार ऐसा प्रतीत होता है कि न तो कोई सबक सीखा गया है और न ही उच्चतम स्तर पर कोई आगे की कार्रवाई की गई है। 

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उद्योग विभाग के विशेष सचिव द्वारा दायर शपथ पत्र को काफी दिलचस्प बताया। इसमें यह बताया गया है कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135(7) के अनुसार जुर्माना आदि की प्रक्रिया भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आती है और मामले को 28.2.2026 को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ उठाया गया है। कोर्ट ने पाया कि उद्योग विभाग अभी भी मंत्रालय को डेटा उपलब्ध करवाने और आपदा प्रबंधन गतिविधियों में योगदान के संबंध में संबंधित कंपनियों द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में है। 

मुख्य सचिव को हलफनामा दायर करने के आदेश 
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को एक हलफनामा दायर करने के आदेश दिए, जिसमें आपदा के बाद के पुनर्वास के लिए सीएसआर भागीदारी के संदर्भ में जारी किए गए एक समान लिखित परिपत्रों का खुलासा किया गया हो। साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि क्या राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आपदा-संबंधी बुनियादी ढांचे का कोई जिलावार मूल्यांकन तैयार किया गया है। इसी तरह, उन कार्यों की पहचान जैसे कि पेयजल योजनाएं, अस्पताल, स्कूल और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, जिन्हें सीएसआर फंडिंग के लिए हाथ में लिया जाना था और आपदा समन्वय के लिए उक्त प्राधिकरण की देखरेख में रखा जाना था, का ब्यौरा भी कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा गया है।

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