निजी बसें चलने पर संशय, ऑप्रेटर सरकार के निर्णय से असंतुष्ट

Edited By prashant sharma, Updated: 13 Jun, 2021 11:01 AM

doubt on running private buses

हिमाचल में सोमवार से निजी बसों के चलने पर संशय अभी भी बरकरार है। सरकार ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट खोलने को अनुमति तो दे दी है, लेकिन निजी बस ऑप्रेटरों की हड़ताल अभी समाप्त नहीं हुई है।

शिमला/सोलन (राजेश/रवीन्द्र) : हिमाचल में सोमवार से निजी बसों के चलने पर संशय अभी भी बरकरार है। सरकार ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट खोलने को अनुमति तो दे दी है, लेकिन निजी बस ऑप्रेटरों की हड़ताल अभी समाप्त नहीं हुई है। एसआरटी टोकन टैक्स व वर्किंग कैपिटल की मांग पर कैबिनेट के निर्णय के बाद निजी बस ऑप्रेटरों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह अपनी हड़ताल समाप्त करेंगे या फिर हड़ताल जारी रखेंगे। शनिवार को हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑप्रेटर संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक प्रदेशाध्यक्ष राजेश पराशर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में हड़ताल तोड़ने या जारी रखने पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में निजी बस ऑप्रेटर संघ जिला की यूनियनों पर यह फैसला छोड़ दिया है कि बसें चलानी या नहीं। ऐसे में रविवार शाम 3 बजे दोबारा से निजी बस ऑप्रेटर की बैठक वर्चुअल माध्यम से की जाएगी। 

इस बैठक में जिला यूनियनों की राय पूछी जाएगी। यदि जिला यूनियनें बसें चलाने पर हामी भरती हैं तो फिर सोमवार से निजी बसें चलेंगी वरना निजी बस ऑप्रेटरों की हड़ताल जारी रहेगी। हिमाचल निजी बस ऑप्रेटर संघ के प्रदेश महासचिव रमेश कमल का कहना है कि निजी बस ऑप्रेटर सरकार द्वारा कैबिनेट में लिए गए फैसले से असुंतष्ट हंै। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिर्फ आधा टैक्स माफ  किया है। जब निजी बस ऑप्रेटरों की बसें चली ही नहीं तो फिर वह आधा टैक्स भी क्यों दें। उन्होंने कहा कि सरकार को आधा टैक्स माफ करने की बजाय पूरा टैक्स माफ करना चाहिए था। पिछले साल लॉकडाऊन के कारण बसों की आवाजाही बिल्कुल बंद थी। निजी बस ऑप्रेटरों को घाटा उठाना पड़ा। 

सरकार अपना रही दोहरे मापदंड

बस ऑप्रटर्स यूनियन सोलन के जिला अध्यक्ष रघुवेंद्र मेहता ने कहा कि शनिवार को निजी बस ऑप्रेटरों की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश भर के करीब 100 बस ऑप्रेटर्स ने भाग लिया। निजी बसों को चलाने पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। सरकार ने निजी बस ऑप्रेटरों को राहत के नाम पर झुनझुना थमा दिया है और ऑप्रेटर अपने आप को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं। सरकार एचआरटीसी व निजी आप्रेटर्स के साथ दोहरे मापदंड अपना रही है। सरकार से अब भी उनकी वही मांगें हैं। बसें चलाने को लेकर रविवार को फिर से बैठक की जाएगी। हिमाचल में करीब 3500 रूटों पर निजी बसें दौड़ती हैं।
 

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