Edited By Kuldeep, Updated: 06 May, 2026 07:45 PM

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अब अपनी परीक्षाओं को और भी आधुनिक बनाने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए परीक्षा और प्रश्न पत्रों को बेहतर बनाने के लिए धर्मशाला में तीन दिनों की एक खास...
धर्मशाला (सुनील): हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अब अपनी परीक्षाओं को और भी आधुनिक बनाने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए परीक्षा और प्रश्न पत्रों को बेहतर बनाने के लिए धर्मशाला में तीन दिनों की एक खास वर्कशॉप (कार्यशाला) आयोजित की गई। इसका सीधा फायदा छात्रों को मिलेगा और उनके मूल्यांकन की प्रक्रिया पहले से ज्यादा साफ-सुथरी होगी। बोर्ड ने एक बड़ा बदलाव करते हुए निर्देश दिए हैं कि अब पेपर में 20 से 30 प्रतिशत प्रश्न क्षमता-आधारित होंगे। सरल शब्दों में कहें तो अब आपको सिर्फ सवालों को रटकर जाने से पूरे नंबर नहीं मिलेंगे। आपको विषय को गहराई से समझना होगा ताकि आप यह जान सकें कि उस जानकारी का असल जिंदगी में कैसे इस्तेमाल होता है। यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है ताकि छात्रों में रटने की आदत खत्म हो और वे चीजों को सोचना और समझना सीखें।
सीबीएसई और आईसीएसई के बराबर होगा आपका पेपर
वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञों ने हिमाचल बोर्ड के प्रश्न पत्रों की तुलना सीबीएसई और आईसीएसई जैसे बड़े बोर्ड्स के पेपरों से की। विशेषज्ञों ने सिलेबस, ब्लूप्रिंट और मार्किंग स्कीम को अच्छी तरह जांचा है। इससे फायदा यह होगा कि हिमाचल बोर्ड के छात्र अब नैशनल लेवल की परीक्षाओं जैसे नीट या जेईई के लिए स्कूल के समय से ही बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा का कहना है कि हमारा मकसद शिक्षा को आधुनिक बनाना है ताकि आपको केवल किताबी ज्ञान न मिले, बल्कि आप दिमागी तौर पर भी मजबूत बनें। अब पेपर में 20-30 प्रतिशत सवाल आपकी समझ को परखने वाले होंगे। इससे आप भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए अभी से तैयार हो पाएंगे और आपका सर्वांगीण विकास होगा।