Edited By Swati Sharma, Updated: 27 Mar, 2026 10:50 AM

Shimla News : भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है और इसके बजाय करों एवं ईंधन की बढ़ती...
Shimla News : भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है और इसके बजाय करों एवं ईंधन की बढ़ती कीमतों के माध्यम से जनता पर वित्तीय बोझ बढ़ा रही है।
'सरकार ने राहत देने के बजाय लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाला'
ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस 2022 में 10 वादों के आधार पर सत्ता में आयी थी, लेकिन उनका दावा है कि अब तक इनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राहत देने के बजाय लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाला है। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद डीजल पर मूल्यवर्धित कर (वैट) बढ़ाकर 10.40 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। उनके अनुसार इस कदम से पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ताओं से हजारों करोड़ रुपये की वसूली की गयी है। ठाकुर ने उन खबरों पर भी चिंता व्यक्त की जिसमें कहा गया है कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर ईंधन उपकर लगाने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस बयान का हवाला देते हुए कि ऐसा कोई उपकर अभी तक लागू नहीं किया गया है, उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव ही सरकार के अतिरिक्त शुल्क लगाने के इरादे को दर्शाता है।
'हिमाचल का कर्ज एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया'
भाजपा सांसद ने कहा कि भाजपा जनता पर बोझ बढ़ाने वाले ऐसे किसी भी कदम का विरोध करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक ओर लोग महंगाई के दबाव का सामना कर रहे हैं, वहीं सरकार ने कुछ राजनीतिक नियुक्तियों के लिए वेतन और सरकारी सुविधाओं सहित कई लाभ बढ़ा दिये हैं। श्री ठाकुर ने यह भी दावा किया कि सरकार की कुछ नीतियों को लेकर सत्ताधारी दल के भीतर असंतोष है। इस सुझाव को खारिज करते हुए कि प्रस्तावित उपकर केवल व्यापारियों को प्रभावित करेगा, उन्होंने कहा कि ईंधन की लागत में किसी भी वृद्धि का असर अंतत: किसानों, ट्रांसपोटर्रों, टैक्सी ऑपरेटरों, दुकानदारों एवं उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। ठाकुर ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि हिमाचल प्रदेश का कर्ज एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को अतिरिक्त कर लगाने के बजाय अपने चुनावी वादों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रीत करना चाहिए।