सिरमौर की बहू का कमाल: गोद में बच्चे और हाथ में किताबें, पहले प्रयास में पास किया UGC NET

Edited By Jyoti M, Updated: 06 Feb, 2026 01:50 PM

a woman from sirmaur passed the ugc net exam on her first attempt

सिरमौर के एक छोटे से गाँव की इस बहू ने साबित कर दिया कि अगर इरादों में जान हो, तो मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियां कभी सपनों की राह का रोड़ा नहीं बन सकतीं।

हिमाचल डेस्क। सिरमौर के एक छोटे से गाँव की इस बहू ने साबित कर दिया कि अगर इरादों में जान हो, तो मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियां कभी सपनों की राह का रोड़ा नहीं बन सकतीं।

संघर्षों की बुनियाद पर खड़ा किया सफलता का महल

हिमाचल प्रदेश के संगड़ाह उपमंडल के टीकरी गाँव की सीमा देवी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। बचपन में ही पिता को खो देने वाली सीमा के लिए शिक्षा की राह कभी आसान नहीं थी। लेकिन उनकी माता के अटूट विश्वास ने उन्हें झुकने नहीं दिया। अपनी मेधावी प्रतिभा का परिचय उन्होंने स्कूली शिक्षा के दौरान ही दे दिया था, जब 12वीं कक्षा में अव्वल रहने पर उन्हें सरकारी सम्मान के तौर पर लैपटॉप मिला था। यही वह समय था जब उन्होंने ठान लिया था कि अभाव उनकी पहचान नहीं बदल पाएंगे।

शादी और मातृत्व के बीच भी नहीं डिगा लक्ष्य

अक्सर माना जाता है कि शादी के बाद एक महिला का करियर गौण हो जाता है, लेकिन सीमा ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया। साल 2018 में विवाह के रिश्ते में बंधने के बाद, उन्होंने न केवल अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की, बल्कि जेबीटी, बीएड और हिंदी विषय में एम.ए. की डिग्रियां भी हासिल कीं। दो नन्हे बच्चों की परवरिश और घर की व्यस्तता के बीच समय निकालकर उन्होंने खुद को 'यूजीसी नेट' जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए तैयार किया और अपने पहले ही प्रयास में इसे फतह कर लिया।

पति का साथ और अटूट संकल्प

सीमा की इस जीत में उनके पति रामानंद, जो पेशे से एक किसान हैं, की भूमिका किसी ढाल की तरह रही। खेती-बाड़ी के काम के बीच उन्होंने सीमा के सपनों को कभी मुरझाने नहीं दिया। उनके प्रोत्साहन और सीमा के कुशल समय-प्रबंधन का ही परिणाम है कि आज पूरा सिरमौर इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।

नई पीढ़ी के लिए एक मशाल

सीमा देवी आज उन तमाम महिलाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण बन गई हैं, जो शादी या बच्चों के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। उनकी यह कामयाबी संदेश देती है कि ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद, यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, तो आसमान भी छोटा लगने लगता है। उनके घर पर आज बधाई देने वालों का तांता लगा है, क्योंकि उनकी यह जीत केवल एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि संघर्ष की एक बड़ी दास्तां है।

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