Edited By Kuldeep, Updated: 25 Oct, 2025 09:29 PM

शिक्षा विभाग में वर्ष 2019 से 2025 के मध्य टीजीटी से प्रमोट हुए 592 प्रवक्ता को डिमोट करने के निर्णय पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शिक्षक संगठन विभाग के इसे फैसले को रिव्यू करने की मांग कर रहे हैं।
शिमला (ब्यूरो): शिक्षा विभाग में वर्ष 2019 से 2025 के मध्य टीजीटी से प्रमोट हुए 592 प्रवक्ता को डिमोट करने के निर्णय पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शिक्षक संगठन विभाग के इसे फैसले को रिव्यू करने की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इस प्रमोशन के बाद भी मौजूदा समय में टीजीटी के 1012 प्रमोशन कोटा में उपलब्ध हैं। शिक्षा विभाग को रिवाइज वरिष्ठता प्राप्त शिक्षकों को इन रिक्त पदों पर एकमुश्त प्रमोशन देते हुए डिमोशन से बचना चाहिए।
शिक्षकों का कहना है कि प्रमोशन और डिमोशन करने के लिए डीपीसी उत्तरदायी होती है, न कि इसके शिक्षक जिम्मेदार हैं। ऐसे में पदोन्नत शिक्षकों को भेजे गए कारण बताओ नोटिस का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि शिक्षकों ने अपनी पदोन्नति स्वयं नहीं की थी, बल्कि यह विभागीय डीपीसी प्रक्रिया के माध्यम से की गई थी। डिमोशन करना वरिष्ठता विवाद का समाधान नहीं, बल्कि रिक्त पदों पर प्रमोशन इसका हल है।
जब विभाग में टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नति कोटे के 1012 पद रिक्त हैं, तब डिमोशन की बजाय इन्हें पात्र वरिष्ठ टीजीटी की प्रमोशन से एकमुश्त भरा जाना चाहिए। राजकीय टी.जी.टी. कला संघ महासचिव विजय हीर ने शिक्षा विभाग से उक्त मांग की है। उधर, हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने भी विभाग के इस फैसले का विरोध किया है और विभाग ने इन शिक्षकों को डिमोट न करने की मांग की है।
विभाग में पिछले सात वर्षों में हुई सीमित पदोन्नतियां, अगस्त 2025 तक प्रवक्ता कैडर के 3208 रिक्त पद
हीर ने कहा कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच 338 टीजीटी सेवानिवृत्त हुए हैं और 3208 रिक्त पद प्रवक्ता कैडर में अगस्त 2025 तक मौजूद हैं। विभाग में पिछले सात वर्षों में सीमित पदोन्नतियां हुईं। 2019 में 356, 2021 में 707, 2022 में 845, 2023 में 401 और 2025 में 642 टीजीटी प्रवक्ता बने हैं। इस दौरान कुल 2951 प्रमोशन हुई। इसी अवधि में 988 टीजीटी हैडमास्टर बने। वर्ष 2018 से 2025 तक दोनों श्रेणियों में कुल 3939 प्रमोशन हुई है। विभाग ने 2019 से 2025 के मध्य प्रमोशन के लिए शिक्षकों से आवेदन मांगे और स्वयं डीपीसी. आयोजित कर प्रमोशन की।
अब उन्हीं 592 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस भेजना और डिमोशन की चेतावनी देना न तो तर्कसंगत है, न न्यायसंगत है। स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को न्यायालयों में लंबित मामलों की जानकारी नहीं होती, इसलिए उनसे इस आधार पर जवाब मांगना अनुचित है। हीर ने कहा कि शिक्षा विभाग को 1012 रिक्त पदों में से 592 पदों पर शीघ्र प्रमोशन करते हुए वैधानिक विवाद सुलझाना चाहिए और पात्र शिक्षकों को बैकडेट से प्रमोशन और वित्तीय लाभ देने चाहिए।