Edited By Jyoti M, Updated: 23 Jan, 2026 09:58 AM

हिमाचल प्रदेश की वादियों में आखिरकार वो मंजर लौट आया है जिसका इंतज़ार सेब के बागवानों से लेकर सैलानियों तक को था। प्यासी धरती को जब आसमान से गिरते फाहे (बर्फ) ने छुआ, तो हिमाचल के चेहरे पर रौनक लौट आई।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की वादियों में आखिरकार वो मंजर लौट आया है जिसका इंतज़ार सेब के बागवानों से लेकर सैलानियों तक को था। प्यासी धरती को जब आसमान से गिरते फाहे (बर्फ) ने छुआ, तो हिमाचल के चेहरे पर रौनक लौट आई। हालांकि, इस खूबसूरती के साथ कुछ चुनौतियां भी आई हैं, जिसने प्रशासनिक अमले को पूरी तरह चौकन्ना कर दिया है।
सूखे के संताप से मिली मुक्ति
पिछले लगभग साढ़े तीन महीनों से बारिश और बर्फबारी की राह देख रहे किसानों और बागवानों के लिए यह मौसम किसी वरदान से कम नहीं है। नमी की कमी के कारण मुरझा रही फसलों और सेब के बगीचों को इस बर्फबारी ने नया जीवनदान दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह हिमपात आने वाली फसल के लिए संजीवनी का काम करेगा।
ठिठुरन के साथ थमी रफ्तार
बर्फबारी के कारण पर्यटन और खेती में तो खुशी की लहर है, लेकिन सामान्य जनजीवन पर इसका खासा असर पड़ा है:
यातायात पर ब्रेक: ऊपरी शिमला को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग बर्फ की मोटी परत जमने के कारण फिलहाल बंद हैं। विशेष रूप से देहा से चौपाल जाने वाला रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
फिसलन का खतरा: ढली और कुफरी के बीच की सड़कें काफी खतरनाक हो गई हैं। टायर फिसलने की वजह से गाड़ियों का निकलना मुश्किल हो रहा है।
अंधेरे में डूबे इलाके: तेज़ बर्फीली हवाओं और तूफान ने बिजली की लाइनों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति ठप है।
प्रशासन की ओर से सावधानी की अपील
बिगड़ते मौसम और सड़कों पर बढ़ती फिसलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त हिदायत जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे जब तक बहुत ज़रूरी न हो, प्रभावित ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा न करें। तेज़ हवाओं और खराब दृश्यता के कारण जोखिम बढ़ सकता है।