गुरु गोविंद जीवन आश्रम परौर में स्वामी प्रकाशानंद पुरी महाराज को दी समाधि

Edited By Vijay, Updated: 11 Jun, 2022 11:12 PM

swami prakashanand puri maharaj

गुरु गोविंद जीवन आश्रम परौर के संस्थापक स्वामी प्रकाशानंद पुरी महाराज को शनिवार को आश्रम में समाधि दी गई। सुबह 9 बजे से साढ़े 10 बजे तक सेवकों ने समाधि पर मिट्टी, पत्थर, फूल और पूजा की सामग्री समर्पित की।

परौर (केपी पांजला): गुरु गोविंद जीवन आश्रम परौर के संस्थापक स्वामी प्रकाशानंद पुरी महाराज को शनिवार को आश्रम में समाधि दी गई। सुबह 9 बजे से साढ़े 10 बजे तक सेवकों ने समाधि पर मिट्टी, पत्थर, फूल और पूजा की सामग्री समर्पित की। इस मौके पर हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी विश्वानंद, महामंडलेश्वर महेशानंद और हरिद्वार से जनकपुरी महाराज, चित्रकूट से भार्गव ब्रह्मचारी, स्वामी प्रकाशानंद के शिष्य प्रेमानंद, गुजरात के पूर्व मंत्री आरसी फलदू, विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार, पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल समेत प्रदेशभर से पहुंचे सेवक मौजूद रहे। 

1983 में रखी थीं गुरु गोविंद सिंह आश्रम की नींव
स्वामी प्रकाशानंद ने सन् 1983 में गुरु गोविंद सिंह आश्रम की नींव रखने के बाद आध्यात्मिक व सनातन धर्म के लिए प्रचार-प्रसार शुरू किया था। 39 वर्ष परौर की धरती पर गुजारने के बाद स्वामी प्रकाशानंद 90 वर्ष की उम्र में शुक्रवार सुबह 6 बजे ब्रह्मलीन हो गए थे। आश्रम के प्रधान प्रदीप ठाकुर और संस्कृत काॅलेज के शास्त्री कैलाश ने बताया कि समाधि के बाद भंडारा और प्रसाद भी बांटा गया। 25 जून को षोडसी होगी। आश्रम की जिम्मेदारी अब स्वामी प्रकाशानंद पुरी महाराज के शिष्य प्रेमानंद संभालेंगे। नम आंखों से सेवकों ने बताया कि स्वामी का सत्संग सुनने के बाद चारों तरफ से खुशियां आती थीं। वह हर साल विभिन्न तीर्थ स्थलों में 3 दिन का संत सम्मेलन करवाते थे  जिसमें भारत के सभी संत पहुंचते थे। स्वामी 90 साल की उम्र में भी खुद खाना बनाते थे और आश्रम के खेतों में भी काम करते रहते थे। 

सबको एक नजर से देखने वाले स्वामी ने शरीर त्यागा, मन से कभी नहीं मिट पाएंगे
आश्रम में आए सुलह विधानसभा क्षेत्र के बोदा गांव निवासी कुलभूषण और बड़ोह के लुहना गांव निवासी नानक चंद ने बताया कि स्वामी सभी को एक नजर से देखते थे। भक्ति में लीन रहते थे। उनकी वजह से घर की कई परेशानियों से छुटकारा मिला। वे शरीर त्याग गए हैं लेकिन उनके विचार अभी भी मन में हैं। 

कैंसर के बाद आश्रम पहुंची तो लगा जिंदगी बढ़ गई
24 साल से आश्रम से जुड़ी आरठ की कुसमलता ने बताया कि करीब 30 साल पहले जब वह बच्चे के साथ परौर आ रही थी तो किसी ने कहा कि यहां उग्रवादी हैं। फिर बच्चे के साथ झाड़ियों में छिप गई। हालांकि बाद में भतीजे ने स्वामी से दीक्षा ग्रहण की थी। कुछ समय बाद छाती में कैंसर की प्राॅब्लम हो गई। कई जगह ऑप्रेशन करवाए। आश्रम आई तो स्वामी जी ने कहा कि तुम अब मरोगी नहीं। मानों जिंदगी बढ़ गई। उनके चरण पड़ते ही मैं अब भी ठीक हूं। आज स्वामी जी नहीं दिख रहे तो ऐसा लग रहा है कि कोई चीज गुम हो गई है। कुछ भी समस्या होती थी स्वामी के पास आते थे। 

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