'अंतिम गोली, अंतिम जवान तक लड़ूंगा'...टूटे हाथ के साथ 500 दुश्मनों से भिड़ गया था भारत मां का ये शेर, पालमपुर में गूंजी शौर्यगाथा

Edited By Vijay, Updated: 31 Jan, 2026 03:43 PM

pvc major som nath sharma

देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा की जयंती के अवसर पर पालमपुर में एक विशेष श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर स्थानीय विधायक आशीष बुटेल ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन किया।

पालमपुर (भृगु): देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा की जयंती के अवसर पर पालमपुर में एक विशेष श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर स्थानीय विधायक आशीष बुटेल ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन किया। उनके साथ शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा की भतीजी राधिका शौनिक भी उपस्थित थीं, जिन्होंने अपने पूर्वज की वीरता को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने मेजर शर्मा के अदम्य साहस को याद किया, जिन्होंने 1947 के भारत-पाक युद्ध में श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

दुश्मनों ने तीन तरफ से घेरा, फिर नहीं डगमगाया हाैसला
मेजर सोमनाथ शर्मा का नाम भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 3 नवम्बर, 1947 को जब पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण किया, तब मेजर सोमनाथ शर्मा और उनकी कंपनी को बडगाम पहुंचने के आदेश मिले। यह वही रूट था जहां से लगभग 500 पाकिस्तानी आक्रमणकारी श्रीनगर की ओर बढ़ रहे थे। उस समय हॉकी मैच के दौरान लगी चोट के कारण मेजर सोमनाथ शर्मा का बायां हाथ फ्रैक्चर था और उस पर प्लास्टर चढ़ा हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने दर्द की परवाह किए बिना उच्चाधिकारियों के आदेश का पालन किया। दुश्मनों द्वारा तीन तरफ से घिरे होने और भारी गोलाबारी के बावजूद मेजर शर्मा ने पीछे हटने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने अपने ऐतिहासिक संदेश में कहा था कि मैं 1 इंच भी पीछे नहीं हटूंगा, अंतिम गोली तथा अंतिम जवान तक लड़ाई जारी रखूंगा।

25 वर्ष की आयु में दिया सर्वोच्च बलिदान 
युद्ध के मैदान में मेजर सोमनाथ शर्मा एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट पर जाकर अपने जवानों का हौसला बढ़ाते रहे। इसी दौरान एक मोर्टार का गोला आकर फटा और महज 25 वर्ष की आयु में उन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। आज यदि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग और मुकुट है, तो इसका श्रेय मेजर सोमनाथ शर्मा की वीरता को जाता है। उनके इस अद्वितीय बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत स्वतंत्र भारत के प्रथम सर्वोच्च वीरता सम्मान 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया। उनके सम्मान में अब अंडमान निकोबार के सबसे बड़े अनाम द्वीप का नामकरण भी इस रणबांकुरे के नाम पर किया गया है।

भावी पीढ़ियों को लेनी चाहिए प्रेरणा : आशीष बुटेल 
श्रद्धांजलि सभा में विधायक आशीष बुटेल ने कहा कि मेजर सोमनाथ शर्मा का बलिदान न केवल पालमपुर और हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भावी पीढ़ियों को उनके राष्ट्रप्रेम और साहस से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस दौरान नगर निगम के महापौर गोपाल नाग, उप महापौर राज कुमार और पार्षदों ने भी शहीद को नमन किया। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर नगर निगम आयुक्त नेत्रा मेती, एसडीएम पालमपुर डॉ. ओपी यादव और तहसीलदार साजन बग्गा ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी और शहर की धरोहर के रूप में उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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