Nurpur : नहीं थम रहा अवैध कटान, थोरा जंगल में मिले जड़ से उखड़े खैर के पेड़

Edited By Swati Sharma, Updated: 18 Feb, 2026 07:13 PM

nurpur  illegal felling of khair trees in thora

Kangra News: हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा का नूरपूर वन मंडल एक बार फिर सवालों के घेरे में आ चुका है। नूरपूर रेंज में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला लगातार गहराता जा रहा है। ताजा मामला थोरा भलुन बीट का है, जहां बासा सुनेटिया गांव से सटे जंगलों...

Kangra News: हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा का नूरपूर वन मंडल एक बार फिर सवालों के घेरे में आ चुका है। नूरपूर रेंज में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला लगातार गहराता जा रहा है। ताजा मामला थोरा भलुन बीट का है, जहां बासा सुनेटिया गांव से सटे जंगलों में बड़ी संख्या में हरे-भरे खैर के पेड़ जड़ से उखड़े हुए नजर आए। यहां पर वन विभाग तो मौके पर नहीं पहुंचता, लेकिन जब हमारी टीम ने मौके का दौरा किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जो वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

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ट्रैक्टर में बिना मार्किंग के 48 मोछे बरामद

टीम के मौके पर पहुंचने पर एक ट्रैक्टर खैर से लदा हुआ पाया गया। पूछताछ में पता चला कि यह लकड़ी ठेकेदार की है, लेकिन वहां मौजूद वन मित्र कहता है कि यह लकड़ी अवैध रूप से काटी गई है और इसे जब्त कर ब्लॉक ऑफिसर के कार्यालय ले जाया जा रहा है। हालांकि मौके पर न तो कोई फॉरेस्ट गार्ड मौजूद था और न ही ब्लॉक ऑफिसर। केवल वन मित्र और कुछ मजदूर ही वहां दिखाई दिए। जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित कोई दस्तावेज या औपचारिक कार्रवाई भी मौके पर नजर नहीं आई।

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करीब 32 खैर के पेड़ जड़ से उखाड़े और कटे हुए मिले

जब जंगल के अंदर पंजाब केसरी की टीम ने निरीक्षण किया गया तो स्थिति और गंभीर पाई गई। करीब 32 खैर के पेड़ जड़ से उखाड़े और कटे हुए मिले। इन पर भी किसी प्रकार की नंबरिंग या मार्किंग नहीं थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ट्रैक्टर में लदे मोछे इन्हीं पेड़ों के हैं, तो उनपर मार्किंग क्यों नहीं की गई? मौके पर बड़ी मात्रा में पड़ी फ्यूल वुड (ईंधन लकड़ी) को क्यों नहीं उठाया गया? क्या यह लापरवाही है या अवैध कटान को छिपाने का प्रयास? पूरे घटनाक्रम से वन विभाग के कुछ अधिकारियों और अवैध कटान में संलिप्त लोगों के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच कार्रवाई की जाए तो अवैध कटान का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। वहीं, जो लोग अवैध कटान के खिलाफ आवाज उठाते दिखे तो उन्हें मीडिया के सामने ही दबाने की कोशिश की गई।

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क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

स्थानीय निवासी कालुदीन चौहान ने बताया कि उन्होंने हेल्पलाइन नंबर पर अवैध कटान की शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन उस पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अवैध कटान लगातार जारी है।अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है।

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