Edited By Vijay, Updated: 16 May, 2024 11:41 AM

जिला चम्बा में संरक्षित वन्य जीवों का बड़े स्तर पर अवैध शिकार किया जा रहा है। शिकार करने के बाद वन्य प्राणियों के अंगों को बेचकर तस्कर खूब चांदी कूट रहे हैं। इसका खुलासा वन विभाग द्वारा रिमांड पर लिए आरोपियों से पूछताछ में हुआ है।
चम्बा (काकू चौहान): जिला चम्बा में संरक्षित वन्य जीवों का बड़े स्तर पर अवैध शिकार किया जा रहा है। शिकार करने के बाद वन्य प्राणियों के अंगों को बेचकर तस्कर खूब चांदी कूट रहे हैं। इसका खुलासा वन विभाग द्वारा रिमांड पर लिए आरोपियों से पूछताछ में हुआ है। वन विभाग की टीम ने आरोपियों के ठिकानों पर जाकर जांच की। इस दौरान उनके कब्जे से मॉनिटर लिजर्ड की 7 हत्थाजोड़ी, 278 सियार सिंगी (गीदड़ सिंगी) मिली है। इसके अलावा वन्य प्राणियों के 90 से अधिक नाखुन, सांप की त्वचा, कुछ हड्डियां, करीब 50 मांस के टुकड़े व माॅनिटर लिजर्ड के 9 पंजे बरामद हुए हैं। वन विभाग ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। अब इन्हें फोरैंसिक जांच के लिए देहरादून भेजा जाएगा।
वन विभाग की टीम को जिले में वन्य प्राणियों के अवशेषों की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के बाद करीब 15 दिनों से वन विभाग के कर्मचारी तस्करों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। 2 दिन पहले वन विभाग ने चम्बा-खजियार मार्ग पर गेट के पास नाका लगाकर 2 लोगों को पकड़ा था। उनसे मॉनिटर लिजर्ड (बड़ी छिपकली) की चार हत्थाजोड़ी मिली थी। जब इनके ठिकानों पर रेड की गई तो वहां से और दो हत्थाजोड़ी मिली थी। इनके लिंक महाराष्ट्र से जुड़े पाए गए।
इसके बाद वन विभाग की टीम को सूचना मिली कि एक और गिरोह सक्रिय है। इस दूसरे गिरोह को टीम ने बालू में पकड़ा था। इसमें 4 लोग शामिल थे। ये सभी राजस्थान से हैं। उनके ऊपर भी नजर रखी थी। न्यायालय में पेश करने के बाद जब रिमांड के दौरान इनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि पहले आरोपियों ने तीसा के नजदीक नकरोड़ में डेरा लगाया था। यहां पर शिकार किया। जब टीम आरोपियों को निशानदेही के लिए नकरोड़ लेकर गई तो शिकार किए गए स्थान पर हड्डियां मिलीं। शिकार को फंसाने के लिए उन्होंने चिकन को लगाकर फंसाया था। इसे सुबूत के तौर पर बरामद किया गया है।
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