Kullu: राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल के शासन में चमकेंगी फसलें, राजनेताओं में बढ़ेगा टकराव

Edited By Kuldeep, Updated: 19 Mar, 2026 04:34 PM

kullu politician conflict

देवभूमि कुल्लू में हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आगाज हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ हुआ।

कुल्लू: देवभूमि कुल्लू में हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आगाज हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ हुआ। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन मंदिरों में मां भगवती के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस पावन अवसर पर घाटी के प्रमुख आराध्य भगवान रघुनाथ के मंदिर में विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्राचीन समय से ही विक्रम संवत के दिन सुबह गुड़ का सेवन करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जो जीवन में मिठास और सकारात्मकता का प्रतीक है।

नववर्ष के उपलक्ष्य में प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए राजपुरोहितों द्वारा वार्षिक पत्रिका पढ़ी गई। इस वर्ष के ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया गया कि विक्रम संवत 2083 में राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। ज्योतिष गणना के अनुसार राजा और मंत्री के इन स्वरूपों के कारण देशभर में इस वर्ष भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिलेगा। राजपुरोहित प्रवीण शर्मा और पुजारी दिनेश शर्मा ने बताया कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह वर्ष काफी हलचल भरा रहने वाला है। पंचांग के अनुसार राजनेताओं के बीच परस्पर विरोध व वैचारिक मतभेद बढ़ेंगे, जिससे सत्ता के गलियारों में उठापटक होने की संभावना है। पुरोहितों ने स्पष्ट किया कि राजपाठ के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रहेगा।

वार्षिक पत्रिका में प्राकृतिक आपदाओं को लेकर भी सचेत किया गया है। भविष्यवाणी के अनुसार इस वर्ष कहीं अत्यधिक बारिश तो कहीं सूखे की स्थिति बनी रहेगी। बाढ़ और अग्नि का प्रकोप रहने से जानमाल के नुक्सान की आशंका जताई गई है। हालांकि कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर है। शुक्र ग्रह की विशेष स्थिति के कारण फल-फूल और फसलों की पैदावार अच्छी होगी।

वैश्विक शांति
विश्व स्तर पर चल रहे संघर्षों पर भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण सांझा किया गया। राजपुरोहितों के अनुसार वर्तमान में युद्ध के कारण वैश्विक हालात गंभीर बने हुए हैं, लेकिन आने वाले समय में विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के बीच सार्थक वार्ता होगी, जिससे युद्ध विराम और शांति की राह प्रशस्त होगी।

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