Edited By Swati Sharma, Updated: 27 Feb, 2026 01:25 PM

रैहन (दुर्गेश कटोच): नूरपुर डिविजन की नूरपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले खन्नी/बदुही ब्लॉक कार्यालय में उस समय स्थिति असामान्य रही, जब हम खन्नी/थोरा विट में हुई कथित अवैध खैर कटान के बाद जब्त किए गए माल को देखने पहुंचे, लेकिन कार्यालय का गेट अंदर से...
रैहन (दुर्गेश कटोच): नूरपुर डिविजन की नूरपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले खन्नी/बदुही ब्लॉक कार्यालय में उस समय स्थिति असामान्य रही, जब हम खन्नी/थोरा विट में हुई कथित अवैध खैर कटान के बाद जब्त किए गए माल को देखने पहुंचे, लेकिन कार्यालय का गेट अंदर से बंद मिला।
अधिकारियों ने गेट नहीं खोला गेट
बता दें कि खन्नी/थोरा विट में हाल ही में खैर के पेड़ों की कटान का मामला सामने आया था। इसके बाद वन विभाग द्वारा लकड़ी को कब्जे में लेने की कार्रवाई की गई थी। जब हम जब्त माल की स्थिति, मात्रा और संबंधित रिकॉर्ड की पुष्टि करने तथा उसे कैमरे में दर्ज करने के उद्देश्य से कार्यालय पहुंचे, तो वहां मौजूद अधिकारियों ने गेट नहीं खोला। उस समय कार्यालय के अंदर कर्मचारी मौजूद थे। परिसर के अंदर बाइक और कार खड़ी थी और गेट को अंदर से बंद किया गया था। अंदर मौजूद कर्मचारियों ने हमे देख भी लिया था, इसके बावजूद गेट नहीं खोला गया और कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बाहर बातचीत के लिए नहीं आया।
मौके पर ही इस संबंध में वन विभाग नूरपुर के डीएफओ को भी सूचना दी गई, लेकिन उसके बावजूद गेट अंदर से बंद ही रखा गया, जिसके कारण हमें वापस लौटना पड़ा।
यह पूरी घटना कई गंभीर प्रश्न खड़े करती हैः-
* यदि जब्ती की कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई है, तो जब्त माल दिखाने में आपत्ति क्यों?
* क्या जब्त लकड़ी का पूरा विवरण संबंधित रजिस्टर में दर्ज है?
* क्या विभाग पारदर्शिता सुनिश्चित करने के बजाय जानकारी को सीमित रखने की कोशिश कर रहा है?
सरकारी कार्यालय में इस प्रकार की स्थिति पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।