यहां भूलकर भी धूम्रपान किया तो झेलनी पड़ सकती है यह सजा

Edited By kirti, Updated: 29 Jun, 2019 12:15 PM

jathani village

कुल्लू जिले की लगघाटी के जठानी गांव में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। देव आदेश के चलते घाटी की एक दर्जन पंचायतों में बीड़ी-सिगरेट का प्रवेश निषेध है। यहां के बाशिंदे तंबाकू और गुटखा आदि का सेवन भी नहीं करते। माना जाता है कि बीड़ी और सिगरेट पीने और...

कुल्लू(दिलीप ठाकुर): कुल्लू जिले की लगघाटी के जठानी गांव में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। देव आदेश के चलते घाटी की एक दर्जन पंचायतों में बीड़ी-सिगरेट का प्रवेश निषेध है। यहां के बाशिंदे तंबाकू और गुटखा आदि का सेवन भी नहीं करते। माना जाता है कि बीड़ी और सिगरेट पीने और पिलाने वालों को देव प्रकोप झेलना पड़ता है।

देव आस्था रखते हैं लोग

भल्याणी गांव के भगवान श्रीकृष्ण के कारदार रूम सिंह नेगी की मानें तो यहां के लोग देव आस्था रखते हैं। देवता ने सदियों से बीड़ी-सिगरेट के सेवन पर प्रतिबंध लगाया है। ग्रामीण बस्तियों में इनके प्रवेश पर भी मनाही है। देव आस्था के चलते लोग इनका सेवन भी नहीं करते। लगघाटी के भल्याणी, जठाणी, खारका, तिउन, ग्रामंग व समालंग सहित दर्जनों गांवों में धूम्रपान के सेवन और प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध है।

इन्हें है अपनी घाटी पर नाज

कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी केर, पूर्व जिला भाषा अधिकारी डॉक्टर सीता राम ठाकुर व राष्ट्रीय रिकार्डधारक संजो देवी आदि का कहना है कि धूम्रपान के लिहाज से वे अपने आप को सुखी मानते हैं। इससे एक ओर जहां देव कानून का पालन हो रहा है, वहीं इससे होने वाली बीमारियों से भी दूर हैं। मेले व त्यौहारों पर भी इसकी पाबंदी होने से एक मिसाल पेश हो सकती है।

 

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