चुनावी दृष्टि पत्र का रिपोर्ट कार्ड तैयार है या चाट गई दीमक: राणा

Edited By prashant sharma, Updated: 14 Jun, 2021 04:03 PM

is the report card of the election vision paper ready or the termites licked

प्रदेश के 2 विधानसभा क्षेत्रों व 1 लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की आहट के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश सरकार को अपने चुनावी दृष्टि पत्र का रिपोर्ट कार्ड भी जनता के बीच लाने की चुनौती दी है।

हमीरपुर : प्रदेश के 2 विधानसभा क्षेत्रों व 1 लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की आहट के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश सरकार को अपने चुनावी दृष्टि पत्र का रिपोर्ट कार्ड भी जनता के बीच लाने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हरेक वर्ग जानना चाहता है कि उनके साथ किए चुनावी वायदों के कागजों को भाजपा कार्यालयों में ही दीमक तो नहीं चाट गई है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि ऐसा तो नहीं है कि केंद्र की तरह प्रदेश सरकार के साढ़े 3 साल में चुनावी वायदे जुमले ही साबित हुए हैं, क्योंकि वस्तुस्थिति यही बताती है कि प्रदेश की जनता से किया कोई भी वायदा पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अब सरकार कोरोना महामारी की आड़ लेकर बहानेबाजी शुरू न कर दे, क्योंकि दृष्टिपत्र में ऐसे वायदे थे, जोकि सरकार को ए.सी. कमरे में बैठकर ही लेने थे तथा विधानसभा चुनाव से पहले हर वर्ग से सुझाव व डिमांड पर ही घोषणा पत्र तैयार होता है तथा पूरी तैयारी के बाद ही भाजपा लोगों के बीच अपने वायदे लेकर आई होगी, जिन पर सरकार ने अब मोहर ही लगानी थी। 

राणा ने कहा कि अभी उपचुनाव हैं और डेढ़ साल बाद विधानसभा का फाइनल मुकाबला भी नजदीक है तो सरकार भी अब हिसाब देने के लिए तैयार रहे। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले सरकारी विभागों में कर्मचारियों की पेंशन हेतु पेंशन योजना समिति व कर्मचारियों के भुगतान से संबंधित समस्याओं के लिए वेतन विवाद निवारण समिति का गठन करने व ठोस भर्ती एवं स्थानातंरण नीति बनाने का वायदा किया था। उद्योगों में 70 फीसदी की जगह 80  फीसदी नौकरियां हिमाचलियों को देने,  शहीदों के सम्मान में उनके गांव में स्मारक और शहीदी पार्क बनाने, सैन्य सेवा के प्रशिक्षण हेतु मेजर सोमनाथ शर्मा स्कूल खोलने तथा अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त जवानों को सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों के बराबर का हक दिलाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि ये तो महज कुछ वायदे हैं, जबकि दृष्टिपत्र में इन्हीं वर्गों से और भी कई लुभावने वायदे व युवाओं को सशक्त तथा महिलाओं को संबल बनाने की चाशनी परोसी थी, जिनपर सरकार ने काम तो नहीं किया, लेकिन अपने भाषणों व बैठकों में जिक्र तक नहीं किया है।
 

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