फिर सवालों के घेरे में नूरपुर वन विभाग! ज्वाली रेंज में खैर के 11 पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी, खुलासे के बाद जागी वन विभाग की टीम

Edited By Swati Sharma, Updated: 17 Mar, 2026 12:35 PM

axes wielded against 11 khair trees in kangra s jawali range

Kangra News ( दुर्गेश कटोच) : नूरपुर वन डिवीजन एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। ज्वाली रेंज की रैहन बीट में हरे-भरे खैर के पेड़ों का अवैध कटान का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की भनक तक वन विभाग के अधिकारियों को...

Kangra News ( दुर्गेश कटोच) : नूरपुर वन डिवीजन एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। ज्वाली रेंज की रैहन बीट में हरे-भरे खैर के पेड़ों का अवैध कटान का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की भनक तक वन विभाग के अधिकारियों को नहीं लगी या फिर वे जानकर भी अनजान बने हुए थे।

तस्वीरें सामने आने के बाद हरकत में आया वन विभाग

सूत्रों के हवाले से लगातार खुलासे करने वाला पंजाब केसरी एक के बाद एक ऐसे मामलों को उजागर कर रहा है। सवाल यह उठता है कि जो जानकारी “सूत्र” मीडिया तक पहुंचा रहे हैं, वही जानकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंच पाती? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर इसके पीछे डर, दबाव और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण काम कर रहा है? अब इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब पंजाब केसरी के रिपोर्टर ने अपनी फेसबुक पर इस अवैध कटान से जुड़ी तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरें सामने आने के बाद ही वन विभाग हरकत में आया। संबंधित फॉरेस्ट गार्ड मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। मौके पर निरीक्षण के दौरान फारेस्ट गार्ड ने यह पुष्टि  की 11 खैर के हरे पेड़ अवैध रूप से काटे गए हैं।

जानें फॉरेस्ट गार्ड ने क्या कहा?

फॉरेस्ट गार्ड ने बताया कि अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा जायेगी और पुलिस में एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी। वही लोगों मे चर्चा है कि अवैध कटान की सूचना देने वालों को या तो धमकाया जाता है या फिर रसूखदार लोगों के जरिए चुप करा दिया जाता है। यही कारण है कि लोग सीधे विभाग के पास जाने से कतराते हैं और मीडिया को ही सुरक्षित माध्यम मानते हैं। और भी चौंकाने वाली बात यह है कि रैहन बीट में कटे पेड़ों की सूचना भी विभाग के फॉरेस्ट गार्ड को मीडिया रिपोर्टर के जरिए मिल रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका है।

पूरे वन डिवीजन की अलग-अलग बीट्स में लगातार सामने आ रहे अवैध खैर कटान के मामले केवल संयोग नहीं हो सकते। यह एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं, जिसमें बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर कटान संभव नहीं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ चुके हैं? या फिर यह “हरा सोना” लूटने का खेल उनकी जानकारी और संरक्षण में चल रहा है? यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो न केवल वन संपदा का भारी नुकसान होगा, बल्कि प्रशासन की विश्वसनीयता भी सवालों के कटघरे में खड़ी रहेगी।

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