हिमाचल में सेब सीजन पर जलवायु परिवर्तन की पड़ी मार

Edited By Punjab Kesari, Updated: 15 Nov, 2017 02:03 PM

climate changing affected apple seasons in himachal

हिमाचल के ऊपरी इलाकों में मौसम के साथ न देने पर इस बार सेब की एक करोड़ पेटियों का कम उत्पादन हुआ है। जहां पहले तकरीबन तीन करोड़ पेटियों का कारोबार होता था इस बार मात्र 2 करोड़ पेटियों का ही उत्पादन बागवान मौसम की बेरूखी के कारण कर पाए हैं। इससे...

PunjabKesariशिमला : हिमाचल के ऊपरी इलाकों में मौसम के साथ न देने पर इस बार सेब की एक करोड़ पेटियों का कम उत्पादन हुआ है। जहां पहले तकरीबन तीन करोड़ पेटियों का कारोबार होता था इस बार मात्र 2 करोड़ पेटियों का ही उत्पादन बागवान मौसम की बेरूखी के कारण कर पाए हैं। इससे बागवानों को एक हजार करोड़ रुपए की चपत लगी है। इसका प्रमुख कारण जलवायु में हो रहा परिवर्तन है। सीजन के दौरान मौसम अचानक गर्म और सर्द हो जा रहा है। जिससे पैदावार पर असर पड़ रहा है।

हिमाचल में 18 लाख पेटियां घरेलू उपभोग की 
जैसे ही किन्नौरी सेब मंडियों में पहुंचा हिमाचल में सीजन खत्म हो गया। बागवानी निदेशालय के मुताबिक दो करोड़ पेटियों का ही उत्पादन हो पाया है। मंडियों में महज एक करोड़ 81 लाख 32 हजार 639 सेब की पेटियां ही उतर पाई हैं। हिमाचल में 18 लाख पेटियां घरेलू उपभोग की गईं। गत वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो दो करोड़ 10 लाख 999 सेब की पेटियां मंडियों पहुंची थीं। वर्ष 2015 के दौरान तीन करोड़ 49 लाख 70 हजार 662 पेटियां और 2014 में दो करोड़ 81 लाख 33 हजार 953 पेटियों का उत्पादन बागवानों ने किया था।

कारोबार तीन हजार करोड़ रुपए के पास ही सिमट गया
पिछले आंकड़ों मुताबिक प्रदेश में 3500 से 4000 करोड़ रुपये का तक सेब कारोबार होता है। इस बार यह तीन हजार करोड़ रुपए के पास ही सिमट गया है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र ठाकुर ने मीडिया को बताया कि खराब मौसम के कारण ही इस साल हिमाचल में सेब सीजन प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में परागण के वक्त मौसम खराब रहा और ओलावृष्टि हुई। फूलों के गिर जाने और फलों में दाग पड़ जाने से पैदावार पर असर पड़ा। 

नए रूट स्टॉक पौधे लगाने होंगे
हिमाचल में हो रहे जलवायु के बदलाव के कारण सेब की पैदावार पर असर पड़ रहा है। सेब सीजन के दौरान मौसम अचानक सर्द व गर्म हो जा रहा है। इससे पैदावार कम हो रही है। राज्य सरकार के प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा ने कहा कि कम पैदावार होने के पीछे जलवायु और पर्यावरण में आया बदलाव ही कारण है। हमें इसे ध्यान में रखकर इस नए रूट स्टॉक के पौधों को लगाना ही होगा।

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