Edited By prashant sharma, Updated: 15 Oct, 2021 03:14 PM

कुल्लू का अंतरराष्ट्रीय दशहरा देवी देवताओं के आगमन से शुरू हुआ है वही रघुनाथ जी के पास देवी देवताओं ने अपनी हाजिरी भरी। कोरोना काल के चलते इस बार अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में किसी प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधिया वह मार्केट नहीं सजेगी।
कुल्लू (दिलीप) : कुल्लू का अंतरराष्ट्रीय दशहरा देवी देवताओं के आगमन से शुरू हुआ है वही रघुनाथ जी के पास देवी देवताओं ने अपनी हाजिरी भरी। कोरोना काल के चलते इस बार अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में किसी प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधिया वह मार्केट नहीं सजेगी। इस बार कई साल पुराना दशहरा देखने को मिलेगा जिसमें देवी देवताओं का आपस में मिल मिलाप होगा। 17 अक्तूबर को कुष्टू काहिका भी आयोजन होगा।
रघुनाथ के छड़ीदार महेश्वर सिंह ने बताया कि आज बहुत ही प्रसन्नता का दिन है। सरकार के सहयोग से और दशहरा कमेटी के सहयोग से और कुल्लू जनपद की जनता के सहयोग से ऐसा लग रहा है कि जैसे कि प्राचीन दूसरा होता था जिसमें देवी देवताओं का संगम समागम होता था। लोगों ने नजराने की परवाह न करते हुए अपने खर्चे पर देवी-देवताओं को लाए हैं जिसके लिए सभी देवी देवताओं का आभार प्रकट करता हूं। उन्होंने कहा कि यहां पर देवी देवताओं का संगम समागम रहेगा जिसमें रोज देवी देवताओं का कोई ना कोई कार्यक्रम रहेगा। उन्होंने कहा कि शुद्धि का कार्य का आयोजन भी किया जाएगा, वह 17 अक्टूबर को होगा बड़ी पूजा के बाद और जलवे से पहले उसका संपन्न किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विशेष जाति के नड़ के द्वारा इस काहिका का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसमें नड़ वध नहीं होगा। बल्कि मंत्रोच्चारण से ही इसे किया जाएगा। जिसे की हम कुष्टु काहिका का कहते हैं। उन्होंने कहा कि रघुनाथ की अस्त्र शस्त्र पूजा हो गई है उसके बाद रघुनाथ जी पालकी में सवार होकर ढालपुर की ओर रवाना होंगे।