किसानों का दावा, नहीं मिले बंदर मारने के पैसे

Edited By Simpy Khanna, Updated: 26 Aug, 2019 11:40 AM

farmers claim no money to kill monkey

हिमाचल सरकार के उदासीन रवैये को देखते हुए किसानों ने बड़ी संख्या में उत्पाती बंदर स्वयं मार दिए हैं। इससे किसानों ने करोड़ों की फसलें बर्बाद होने से बचाई हैं। ग्रामीण इलाकों में जिन किसानों ने बंदरों के आतंक के कारण खेत बंजर छोड़ दिए थे, उन्होंने...

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल सरकार के उदासीन रवैये को देखते हुए किसानों ने बड़ी संख्या में उत्पाती बंदर स्वयं मार दिए हैं। इससे किसानों ने करोड़ों की फसलें बर्बाद होने से बचाई हैं। ग्रामीण इलाकों में जिन किसानों ने बंदरों के आतंक के कारण खेत बंजर छोड़ दिए थे, उन्होंने फिर से नकदी फसलों की खेती शुरू की है। यह दावा शिमला में आयोजित हिमाचल किसान सभा की 2 दिवसीय बैठक में किया गया।

इसमें सिरमौर, सोलन, मंडी, शिमला, कांगड़ा व चम्बा जिलों से आए किसान प्रतिनिधियों ने रिपोर्ट किया कि बंदरों के वर्मिन घोषित होने के बाद बंदूकें व असला न होने के कारण किसानों ने चूहे मारने वाली दवाई का इस्तेमाल कर बंदरों का सफाया करके अपनी फसलों को बचाने की मुहिम शुरू की है लेकिन वन विभाग ने इसकी कोई सुध नहीं ली। सरकार ने प्रत्येक बंदर को मारने पर 1,000 रुपए की ईनामी राशि की घोषणा कर रखी है लेकिन जिन किसानों ने जहर देकर बंदर मार गिराए हैं, उन्हें प्रोत्साहन राशि से वंचित रखा गया है।

राज्य कमेटी की बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सह सचिव डा. विजू कृष्णन ने कहा कि बीते 5 सालों से रोजगार के अवसर पैदा होने की बजाय अनगिनत कारोबार और औद्योगिक इकाइयां बंद हो रही हैं जिससे मिला हुआ रोजगार भी उजड़ रहा है। विधायक राकेश सिंघा ने किसानों व तमाम मेहनतकश तबकों से एकजुट होकर संगठित होने तथा आंदोलन विकसित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नवउदारवादी दौर में मेहनतकश तबकों को आॢथक संकट से बाहर निकालने का रास्ता और ज्यादा संकटग्रस्त होता जा रहा है जिसका वर्तमान सरकारों के पास कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा है।
किसान सभा ने सरकार द्वारा बंदरों की नसबंदी पर 30 करोड़ से अधिक राशि खर्च करने को पैसों की बर्बादी बताया। किसानों ने सरकार व विभाग पर आरोप लगाया कि जब मारने की अनुमति दे दी है तो फिर नसबंदी क्यों? इससे तो अच्छा होता कि सरकार प्रशिक्षित शूटरों की टीमें बनाकर इस काम को अंजाम देती।

किसानों के मुद्दों पर किए गए संघर्षों एवं आंदोलनों की समीक्षा की

हिमाचल किसान सभा की 2 दिवसीय बैठक में विभिन्न मसलों को लेकर चर्चा की गई। इसमें अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सह सचिव डा. विजू कृष्णन विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा तैयार समीक्षा प्रपत्र के आधार पर किसानों के मुद्दों पर किए गए संघर्षों एवं आंदोलनों की समीक्षा की गई और केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए भारी बदलावों के खिलाफ आगामी 5 सितम्बर को प्रदेशभर में भी 25 खंडों में किसानों एवं मजदूरों के संगठनों द्वारा व्यापक प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया। किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डा. कुलदीप तनवर ने बताया कि किसान सभा 2019-20 में प्रदेश में 80,000 किसानों को सदस्य बनाएगी।
 

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