Edited By Jyoti M, Updated: 21 Jan, 2026 04:27 PM

उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयनादेवी और बाबा बालकनाथ की तपोस्थली शाहतलाई के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का सपना अब साकार होने जा रहा है। जिला प्रशासन ने गोबिंद सागर झील के ऊपर महत्वाकांक्षी वाटर फेरी योजना पर औपचारिक रूप से कार्य शुरू कर...
बिलासपुर, (बंशीधर) : उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयनादेवी और बाबा बालकनाथ की तपोस्थली शाहतलाई के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का सपना अब साकार होने जा रहा है। जिला प्रशासन ने गोबिंद सागर झील के ऊपर महत्वाकांक्षी वाटर फेरी योजना पर औपचारिक रूप से कार्य शुरू कर दिया है। इस परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए 23 जनवरी को होने वाली श्री नयनादेवी मंदिर न्यास की बैठक में चर्चा कर कार्ययोजना तय की जाएगी।
जानकारी के अनुसार पहले साधारण केबल फेरी सेवा शुरू करने का प्रस्ताव था, लेकिन अब इसे और आधुनिक रूप देते हुए हाई क्वालिटी वाटर फेरी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इस फेरी के माध्यम से केवल यात्री ही नहीं, बल्कि कार, स्कूटर और मोटरसाइकिल भी भाखड़ा झील के आर-पार ले जाए जा सकेंगे। नयनादेवी से शाहतलाई के बीच गोबिंद सागर झील की दूरी लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर है।
वर्तमान में श्रद्धालुओं को शाहतलाई पहुंचने के लिए ऊना जिले के थानाकलां होते हुए लंबा सड़क मार्ग तय करना पड़ता है, जिससे काफी समय और परेशानी होती है। वाटर फेरी शुरू होने से यह दूरी कुछ ही मिनटों में तय हो सकेगी। इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह होगी कि श्रद्धालु एक ही दिन में माता नयनादेवी और बाबा बालकनाथ के दर्शन कर सकेंगे। इससे यात्रा न केवल समयबद्ध होगी, बल्कि अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक भी बनेगी। खास बात यह है कि उत्तर भारत में इस तरह की वाटर फेरी सेवा पहली बार शुरू होने जा रही है।
राहुल कुमार, उपायुक्त बिलासपुर का कहना है कि इस योजना के सिरे चढ़ने से बिलासपुर जिले में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी। सुरक्षित, सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली इस सेवा से हजारों श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय पर्यटन व स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इस योजना के लागू होने से दो प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। श्रद्धालुओं को लंबी सड़क यात्रा से राहत मिलेगी और भाखड़ा झील के आर-पार आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।