डेढ़ माह बाद 16580 फुट उंचे शिंकुला दर्रे में दौड़े वाहन, मनाली से जुड़ा लेह-लद्दाख

Edited By Vijay, Updated: 04 Apr, 2024 06:23 PM

vehicles run in shinkula pass

डेढ़ महीने बाद 16580 फुट उंचे शिंकुला दर्रे में वाहन दौड़ने शुरु हो गए हैं। शिंकुला दर्रा बहाल होने से जंस्कार घाटी के 20 हजार से अधिक लोगों को बड़ी राहत मिल गई है।

मनाली (सोनू) : डेढ़ माह बाद 16580 फुट उंचे शिंकुला दर्रे में वाहन दौड़ने शुरु हो गए हैं। शिंकुला दर्रा बहाल होने से जंस्कार घाटी के 20 हजार से अधिक लोगों को बड़ी राहत मिल गई है। बीआरओ योजक परियोजना की 126 आरसीसी के जवानों ने 55 दिनों में 20 फुट ऊंची बर्फ की दीवार पिघलाकर यह सफलता हासिल की है। शिंकुला दर्रे के खुलने से वाया निम्मू पद्दुम होते हुए लेह-लद्दाख मनाली से जुड़ गया है। बीआरओ की योजक परियोजना के चीफ इंजीनियर रविंद्र कुमार साह ने शिंकुला में वाहनों को हरी झंडी देकर आर-पार करवाया। इससे पहले शिंकुला दर्रा बहाल होने पर छोटे वाहन शंकुला से पद्दुम व पद्दुम से वाया कारगिल होकर लेह पहुंचते थे, लेकिन 20 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद बीआरओ ने पद्दुम-निम्मू सड़क बनाकर देश के सीमावर्ती क्षेत्रों को मजबूती दी है। बीआरओ ने इस साल 14 फरवरी को शिंकुला दर्रा बहाल कर रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन 17 फरवरी के बाद भारी हिमपात होने से शिंकुला दर्रे में 15 से 20 फुट बर्फवारी हुई थी।
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जंस्कार-मनाली के बीच बढ़ेगा पर्यटन कारोबार
शिंकुला दर्रे के बहाल होने से जंस्कार मनाली के बीच पर्यटन कारोबार बढ़ेगा। जिससे जंस्कार के लोगों को भी राहत मिलेगी। इस साल पर्यटकों में मार्च के अंतिम सप्ताह बनकर तैयार हुए निम्मू-पद्दुम मार्ग को देखने की होड़ मचेगी। इससे साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जंस्कार घाटी की खूबसूरती निहारने पर्यटक शिंकुला होते हुए जंस्कार घाटी जाएंगे।

लेह से जोड़ने वाला तीसरा बेहतर विकल्प
बीआरओ योजक परियोजना के चीफ इंजीनियर रविंद्र कुमार शाह कि दर्रे के खुलने से मनाली और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के ज़ांस्कर क्षेत्र के बीच बहुत वाहनों की आवाजाही शुरु हो गई है। शिंकुला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निम्मू-पद्दुम-दारचा (एनपीडी) सड़क पर एकमात्र दर्रा है जो मनाली को दारचा, पद्दुम और निम्मू के माध्यम से लेह से जोड़ने वाला तीसरा बेहतर विकल्प है। एनपीडी में शिंकुला एकमात्र दर्रा है, जिस पर सुरंग का काम शुरू होने वाला है। जिससे यह हर मौसम में चलने वाली सड़क बन जाएगी। इससे न केवल रक्षा क्षमता बल्कि सामाजिक आर्थिक विकास भी बढ़ेगा।
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