जागरूकता के अभाव में कई पशु पालक नहीं करवा रहे हैं पशु का टीकाकरण

Edited By prashant sharma, Updated: 03 Dec, 2021 11:48 AM

due to lack of awareness many animal owners are not getting animal vaccinated

जिला में खुरपका और मुंहपका रोग से पीड़ित पशुओं का पशुपालन विभाग की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर इलाज करना शुरु कर दिया है। इसके साथ ही पशुओं को वैक्सीन भी लगाई गई है। हालांकि कई जगह जानकारी के अभाव में पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं करवा रहे हैं

धर्मशाला (नवीन) : जिला में खुरपका और मुंहपका रोग से पीड़ित पशुओं का पशुपालन विभाग की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर इलाज करना शुरु कर दिया है। इसके साथ ही पशुओं को वैक्सीन भी लगाई गई है। हालांकि कई जगह जानकारी के अभाव में पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं करवा रहे हैं, लेकिन पशु चिकित्सक लोगों को जागरुक भी कर रहे हैं। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक द्वारा 31 दिसम्बर तक पूरे जिला में 100 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य रखा है। जिला में कई जगह खुरपका और मुंहपका रोग से पीड़ित पशुओं की जानकारी मिलने के बाद पशुपालन विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं। टीमों ने अनेक गांवों में पशुओं को टीक लगाए हैं। इसके साथ ही रोग से बचाव को दवाएं भी दी गई। जिला कांगड़ा को करीब साढ़े 3 लाख वैक्सीन प्राप्त हुई हैं। बीते वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से वैक्सीनेशन अभियान नहीं हो पाया था जिस कारण यह रोग अधिक फैल गया। 

क्या है रोग तथा रोग के लक्षण

खुरपका-मुंहपका रोग कीड़े से होता है, जिसे आंखें नहीं देख पाती हैं। इसे विषाणु कहते हैं। यह रोग किसी भी उम्र की गाय व भैंस में हो सकता है। हालांकि, यह रोग किसी भी मौसम में हो सकता है। इसके चपेट में आने से पशु सूख जाता है। उसकी कार्य व उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। टीकाकरण से ही रोग की रोकथाम की जा सकती है। इस रोग की चपेट में आने पर पशु को तेज बुखार आता है। पशु के मुंह, मसूड़े, जीभ के ऊपर, होंठ के अंदर व खुरों के बीच छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं। दाने आपस में मिलकर बड़ा छाला बनाते हैं। छाला फटने पर वहां जख्म हो जाता है। पशु जुगाली बंद कर देते हैं। मुंह से लार गिरने लगती है। वह सुस्त होकर खाना पीना तक छोड़ देता है। खुर में जख्म होने पर वह लंगड़ाकर चलता है। खुरों में कीचड़ लगने पर कीड़े पड़ जाते हैं। कभी-कभी मौत का कारण भी बनता है।

क्या कहते हैं पशुपालन विभाग धर्मशाला के उपनिदेशक

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. संजीव धीमान ने कहा कि टीमें पशुओं को टीकाकरण कर रही हैं। हालांकि कई जगह पशुपालक पशुओं को टीका लगाने से मना कर रहे हैं लेकिन फिर भी पशु चिकित्सकों द्वारा समझाया जा रहा है तथा टीकाकरण के लाभ के बारे में जानकारी दी जा रही है। साढ़े 3 लाख वैक्सीन प्राप्त हुई है तथा 31 दिसम्बर तक लक्ष्य रखा गया है कि 100 फीसदी टीकाकरण हो जाए। संजीव धीमान ने पशुपालकों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण करवाएं।
 

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