"सहमति से शारीरिक संबंध बनाना और बाद में शादी से इनकार कर देना...दुष्कर्म नहीं", नाहन कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Edited By Swati Sharma, Updated: 24 Jan, 2026 07:14 PM

consensual relationships do not constitute rape if they don t lead to marriage

Nahan News: विवाह का भरोसा देकर दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। जिला न्यायालय ने आरोपी को सशर्त जमानत देते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष बालिग हों और संबंध लंबे समय तक चले हों, तो केवल विवाह न होने के आधार पर...

Nahan News: विवाह का भरोसा देकर दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। जिला न्यायालय ने आरोपी को सशर्त जमानत देते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष बालिग हों और संबंध लंबे समय तक चले हों, तो केवल विवाह न होने के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर ऐसे मामले को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

क्या था मामला?

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच लगभग दस वर्षों तक संबंध रहे। अदालत के अनुसार, मौजूदा तथ्यों से यह मामला सहमति से बने संबंधों का प्रतीत होता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि संबंध धोखाधड़ी, दबाव या किसी प्रकार के प्रलोभन के तहत बनाए गए थे। यह मामला 26 अक्तूबर 2025 को माजरा थाना में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पांवटा साहिब निवासी खेम सिंह ने विवाह का आश्वासन देकर लंबे समय तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इन्कार कर दिया। शिकायत में कहा गया था कि इससे उसका आत्मसम्मान आहत हुआ और वह मानसिक रूप से प्रभावित हुई।

अदालत ने आदेश में कहा कि वर्तमान चरण में केवल विवाह न होने के आधार पर मामले को दुष्कर्म की श्रेणी में रखना सही नहीं माना जा सकता। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आरोपी को सशर्त जमानत दी गई है। अदालत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष बालिग हों और संबंध लंबे समय तक चले हों, तो केवल विवाह न होने के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर ऐसे मामले को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

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