हिमाचल सरकार ने पूर्व सैनिकों को दिया बड़ा झटका, जानने के लिए पढ़ें खबर

  • हिमाचल सरकार ने पूर्व सैनिकों को दिया बड़ा झटका, जानने के लिए पढ़ें खबर
You Are HereHimachal Pradesh
Sunday, August 13, 2017-1:59 AM

शिमला: पूर्व सैनिक कोटे से राजकीय सरकारी सेवाओं में आने वाले फौजियों की नौकरी में सैन्य सेवाओं की सीनियोरिटी नहीं जुड़ेगी। पूर्व सैनिक कोटे के लिए कार्मिक विभाग के वर्ष 1972 से लागू नियम 5(1) को समाप्त कर दिया है। नियम के तहत नौकरी में आने के बाद पूर्व सैनिकों को सैन्य सेवाओं की सीनियोरिटी दी जाती थी। यह लाभ पूर्व सैनिकों की वेतन फिक्स करने में भी मिलता था। हाईकोर्ट इस नियम के विरुद्ध 2007 में आदेश दे चुका है लेकिन तब इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने पर सरकार को यथास्थिति बनाने का आदेश हुआ जबकि निर्णय आना शेष है। इस बीच सरकार ने नियम को समाप्त करने का निर्णय ले लिया है जिससे भविष्य में यह लाभ पूर्व सैनिक कोटे के तहत नहीं मिलेंगे। चुनाव से ठीक पहले मंत्रिमंडल के निर्णय को गोपनीय रखने के लिए सरकार की ओर से जारी कैबिनेट निर्णयों की सूची में भी नहीं शामिल किया गया है। 

प्रदेश में लाखों की संख्या में है सौनिक 
प्रदेश में सेवारत और पूर्व सैनिकों की संख्या लाखों में है। सेना से रिटायर आने के बाद उन्हें पूर्व सैनिक कोटे के तहत सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलता है। भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1971 के युद्ध के बाद सरकार ने 1972 में पूर्व सैनिक कोटे के आरक्षण लाभ के नियम बनाए थे। नियम 5 (1) के अनुसार राजकीय सेवाओं में आने वाले पूर्व सैनिकों को सेना में दी सेवाओं को उनकी वरिष्ठता में जोड़ा जाता है। इससे यह पूर्व सैनिक ज्वाइनिंग के बाद से समकक्ष कर्मचारियों और अधिकारियों से सीनियर हो जाते हैं। इस नियम के खिलाफ हाईकोर्ट शिमला में लंबे समय तक वाद पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने वर्ष 2007 में नियम के खिलाफ निर्णय सुनाया।

निर्णय के बाद प्रभावित पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
निर्णय आने के बाद प्रभावित पक्ष सुप्रीम कोर्ट चला गया। सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। सरकार ने नियम को समाप्त कर दिया है। मंत्रिमंडल के फैसले से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक प्रभावित होंगे जबकि भविष्य में भी उनको सीनियोरिटी और वेतन में मिलने वाले लाभ समाप्त हो जाएंगे। बताया जा रहा है कि सरकार अब लिये फैसले से सुप्रीम कोर्ट को भी अवगत करवाएगी। प्रदेश में एचएएस से लेकर लिपिक श्रेणी में हजारों अफसर कर्मचारी तैनात हैं। सरकार के निर्णय के बाद पूर्व सैनिक कोटे से भर्ती का प्रावधान तो रहेगा, लेकिन उन्हें नियम 5 (1) के लाभ नहीं दिए जाएंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस मामले में आना बाकी है, जिसके बाद ही कोटे से जुड़े लाभों पर स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। 

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क  रजिस्टर  करें !