18 दिसंबर का चुनाव परिणाम बदल देगा धुरंधरों की दशा और दिशा

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Wednesday, December 13, 2017-3:38 PM

मंडी (नीरज): 18 दिसंबर की तारीख नजदीक आ रही है और इस दिन राजनीति के कई धुरंधरों के भविष्य की रूपरेखा तय होने वाली है। ऐसे ही एक धुरंधर नेता मंडी से भी हैं और आने वाले चुनाव परिणाम इनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। बात हो रही है राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम की। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वाले सुखराम और उनके परिवार के लिए विधानसभा का चुनाव काफी मायने रखता है। उन्होंने सुखराम के परिवार को इसी उम्मीद के साथ पार्टी में शामिल किया था कि उनको इसका लाभ मिलेगा। मंडी जिला में सुखराम का काफी जनाधार है और यहां से भाजपा को सुखराम के आने के बाद अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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कम सीटें आने पर भाजपा और सुखराम को करना पड़ सकता है आत्ममंथन 
अधिकतर सर्वे मंडी जिला की 10 सीटों में से 6 से 8 सीटें भाजपा को दे रहे हैं। यदि वह 6 से अधिक सीटों पर कब्जा जमा लेती है तो इससे सुखराम और उनके परिवार का कद पार्टी में बढ़ जाएगा। जाहिर सी बात है कि भाजपा सरकार बनने पर अनिल शर्मा को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलना भी तय हो जाएगी। लेकिन यदि वह यहां कम सीटों पर जीत दर्ज करती है तो फिर सुखराम और पार्टी दोनों को आत्ममंथन करना पड़ेगा। राजनीति जानकार भी मानते हैं कि मंडी जिला में उनका अपना एक अलग जनाधार है और इसका कहीं न कहीं भाजपा को लाभ मिलना भी तय है। जानकारों की मानें तो परिणाम सुखराम और उनके परिवार की भविष्य की राजनीति को तय करने वाले होंगे।


चुनाव परिणाम तय करेगा धुंरधरों की दशा और दिशा
बता दें कि सुखराम ने 1998 में जब अपना राजनैतिक दल बनाया था तो उस वक्त भी भाजपा के साथ गठबंधन की सरकार बनाई थी। पांच वर्षों तक यह सरकार चली भी और सुखराम के पार्टी के साथ संबंध भी मजबूत हुए थे। लेकिन इस बार सुखराम विशुद्ध रूप से भाजपा में शामिल हो गए हैं और ऐसे में यह परिणाम उनके परिवार के राजनैतिक भविष्य की दशा और दिशा तय करने वाले हैं।


 


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