साबर कोटी के गीतों पर झूमा शहर

Edited By Updated: 02 Aug, 2015 11:37 AM

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युग द्रष्टा महर्षि वेद व्यास के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा पर्व पर महर्षि वेद व्यास की जन्मभूमि व तपोस्थली व्यासपुर यानी...

बिलासपुर: युग द्रष्टा महर्षि वेद व्यास के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा पर्व पर महर्षि वेद व्यास की जन्मभूमि व तपोस्थली व्यासपुर यानी बिलासपुर नगर में जिला भाषा व संस्कृति विभाग, व्यास नगर समिति, व्यास रक्तदाता समिति, व्यास फाऊंडेशन व व्यास रंग मंच के सौजन्य से आयोजित किए जा रहे 2 दिवसीय व्यास पूर्णिमा महोत्सव की प्रथम सांस्कृतिक संध्या पंजाब के प्रसिद्ध सूफी गायक साबर कोटी के नाम रही। 


साबर कोटी ने अपनी सुरीली आवाज में सूफी गायकी की वो तान छेड़ी कि उपस्थित श्रोता दम साधे हुए उन्हें सुनते रहे। साबर कोटी ने मंच पर आते ही पीरों को सजदा करते हुए अपनी गायिकी की शुरूआत की। उन्होंने ‘देखीं कित्थे छड्डï न जाएं, सानू तेरा ही सहारा’ व ‘हास्यां तो चंगे मैंनू लगते असरू, जेड़े तेरी याद विच बगदे ने’ आदि जैसे सूफी गानों से समां बांध दिया। इसके बाद साबर कोटी ने जब गजल ‘हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह’ सुनाई तो लोग झूम उठे। 


साबर कोटी ने सुरों के शहंशाह स्व. मुहम्मद रफी को सजदा करते हुए जब उनका गीत ‘याद न आए, बीते दिनों की, दिल क्यों बुलाए उन्हें’ व स्व. किशोर दा को याद करते हुए उनका प्रसिद्ध गीत ‘चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए, सावन जो आग लगाए तो उसे कौन बुझाए’ भी अपनी सुरीली आवाज में सुनाए। इससे पूर्व बिलासपुर के उभरते हुए गिटार वादक विशाल ठाकुर ने अपने गिटार की धुन के साथ कुछ गीतों की टुकडिय़ां ‘लई बंजारू आया’, ‘तू मेरी पहली मुहब्बत है’ व ‘गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं’ की बेहतरीन प्रस्तुति दी। डिंपल ठाकुर ने ‘ओ मां तू कितनी अच्छी है, तू कितनी प्यारी है, ओ मां’ गीत की प्रस्तुति दी। 

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