Edited By Vijay, Updated: 19 Jul, 2026 06:46 PM

ऊना जिले में पिता द्वारा अपनी ही 10 वर्षीय मासूम बेटी के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद राज्य महिला आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। रविवार को राज्य महिला आयोग की सदस्य सरोज शर्मा स्वयं पीड़ित बच्ची से मिलने उसके गांव पहुंचीं।
गगरेट (बृज): ऊना जिले में पिता द्वारा अपनी ही 10 वर्षीय मासूम बेटी के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद राज्य महिला आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। रविवार को राज्य महिला आयोग की सदस्य सरोज शर्मा स्वयं पीड़ित बच्ची से मिलने उसके गांव पहुंचीं। मासूम से बातचीत के दौरान उसकी आपबीती सुनकर वह भी भावुक हो गईं और उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने बच्ची को भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में न केवल कानून बल्कि राज्य महिला आयोग भी मजबूती से उसके साथ खड़ा है। मासूम के साथ उसके दो छोटे भाई भी हैं। इनमें एक की उम्र करीब 8 वर्ष है जबकि दूसरा अभी महज 2 वर्ष का है। इन दोनों की देखभाल की जिम्मेदारी भी उसी अबोध बच्ची के कंधों पर आ गई है।
भीषण गर्मी में भी पहने को मिले सर्दियों के कपड़े
बच्चों की दादी ने आयोग सदस्य को बताया कि उनका बेटा जेसीबी ऑप्रेटर था और काम के सिलसिले में पश्चिम बंगाल गया था। वहीं से वह विवाह कर पत्नी को घर लेकर आया। दंपति के तीन बच्चे हुए, लेकिन आए दिन पत्नी के साथ मारपीट होने के कारण वह मायके चली गई। तब से तीनों बच्चे दादी और पिता के भरोसे ही रह रहे थे। पीड़ित बच्ची ने आयोग सदस्य को अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न की कहानी सुनाई। मासूम के दर्द को सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। निरीक्षण के दौरान सरोज शर्मा यह देखकर हैरान रह गईं कि भीषण गर्मी के बावजूद बच्चों ने सर्दियों के मोटे कपड़े पहन रखे थे।
दादी की पैंशन के सहारे पल रहे मासूम
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय है कि बच्चों के भरण-पोषण का एकमात्र सहारा दादी को मिलने वाली वृद्धावस्था पैंशन है। दादी कच्चे मकान में रहती है जबकि बच्चे पिता द्वारा बनाए गए एक कमरे के पक्के मकान में उसके साथ रह रहे थे। आयोग सदस्य ने गांव के लोगों और ग्राम पंचायत प्रधान से भी मुलाकात कर बच्चों की हरसंभव सहायता करने और उनके पालन-पोषण में सहयोग देने की अपील की।
सोमवार को डीसी से मुलाकात करेंगी महिला आयोग की सदस्य
महिला आयोग की सदस्य सरोज शर्मा ने कहा कि सोमवार को वह डीसी ऊना और जिला कार्यक्रम अधिकारी से मुलाकात करेंगी। बच्चों के संरक्षण, शिक्षा और बेहतर पालन-पोषण के लिए सरकारी स्तर पर हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को झकझोर देने वाली हैं और दोषी को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जबकि पीड़ित बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य दिलाना समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।
हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें