Himachal: काहिका उत्सव में माता फुंगणी की चेतावनी! देव स्थलों को टूरिस्ट स्पॉट बनाया तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

Edited By Vijay, Updated: 21 Jul, 2026 02:52 PM

warning of mata phungani in kahika festival

देवभूमि हिमाचल में देवी-देवताओं के अपने कड़े नियम हैं और प्रकृति से छेड़छाड़ उन्हें कतई मंजूर नहीं है। कुल्लू और मंडी जिले की सीमा पर स्थित धार क्षेत्र में सावन महीने में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक धारा रा काहिका उत्सव में यह बात एक बार फिर स्पष्ट...

कुल्लू (दिलीप): देवभूमि हिमाचल में देवी-देवताओं के अपने कड़े नियम हैं और प्रकृति से छेड़छाड़ उन्हें कतई मंजूर नहीं है। कुल्लू और मंडी जिले की सीमा पर स्थित धार क्षेत्र में सावन महीने में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक धारा रा काहिका उत्सव में यह बात एक बार फिर स्पष्ट तौर पर सामने आई है। काहिका मेले के दौरान माता फुंगणी ने गुर के माध्यम से भविष्यवाणी करते हुए देव स्थलों पर बढ़ रही इंसानी दखलंदाजी पर कड़ा ऐतराज जताया है। उत्सव के दौरान माता के कारदार राम लाल ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि माता फुंगणी ने क्षेत्र के पवित्र स्थानों से हो रही छेड़छाड़ और उनकी अवमानना पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। माता ने गुर के माध्यम से स्पष्ट चेतावनी दी है कि देवी-देवताओं के प्राचीन और पवित्र स्थलों को पर्यटक स्थल का रूप न दिया जाए। यदि इंसानों ने अपनी मर्यादा पार की और देव स्थलों का व्यवसायीकरण किया तो मानव जाति को इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

जोत पर छोड़ी गई गाय-भैंसों को तुरंत वापस लाएं
माता ने भविष्यवाणी में सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिन लोगों ने पवित्र जोत (पहाड़ी चोटियों और देव स्थानों) पर अपनी गाय और भैंसों को खुला छोड़ दिया है, वे उन्हें तुरंत वहां से वापस ले जाएं। ऐसा न करना मानव जाति के लिए अशुभ होगा। माता का स्पष्ट संदेश है कि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत तभी सुरक्षित रह सकती है, जब प्राचीन स्थानों से छेड़छाड़ बंद हो।

देव नीति से ही मिलेगी सुख-शांति
माता ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यदि मानव जाति देव नीति के अनुरूप अपना जीवन यापन करेगी तो आने वाले समय में क्षेत्र में अपार सुख-समृद्धि और शांति बनी रहेगी, लेकिन अगर इन नियमों की अनदेखी हुई, तो लोगों को दैवीय प्रकोप का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

धारा रा काहिका का देव समाज में विशेष महत्व
सावन महीने में होने वाले इस काहिका उत्सव का देव समाज में विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले धारा रा काहिका का आयोजन किया जाता है, जिसके संपन्न होने के बाद ही कुल्लू की लगघाटी और मंडी क्षेत्रों में काहिका उत्सव मनाए जाते हैं। इस वर्ष उत्सव में माता फुंगणी, देवता पंचाली नारायण, दलीघाट की माता और चौहारघाटी की माता फुंगणी सहित अन्य देवी-देवताओं के कारकूनों ने पूरे विधि-विधान से देव आदेशों का निर्वहन किया। इस पवित्र देव-काज को संपन्न करवाने में पंडित अतुल शर्मा, कुबेर शर्मा और कालू राम नड़ ने अपनी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!