मोदी राज में सबसे ज्यादा डीजल-पैट्रोल की महंगाई ने लूटी जनता : राजेंद्र राणा

Edited By Vijay, Updated: 22 May, 2022 08:17 PM

state congress working president and mla rajender rana

चुनाव के बाद पिछले 2 महीनों में 10 रुपए प्रति लीटर डीजल-पैट्रोल के रेट बढ़ाकर अब 9.50 रुपए रेट कम करना बीजेपी सरकार का नया पैंतरा है। यह बात प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष एवं सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रैस बयान में कही है।

हमीरपुर (ब्यूरो): चुनाव के बाद पिछले 2 महीनों में 10 रुपए प्रति लीटर डीजल-पैट्रोल के रेट बढ़ाकर अब 9.50 रुपए रेट कम करना बीजेपी सरकार का नया पैंतरा है। यह बात प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष एवं सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रैस बयान में कही है। राणा ने कहा कि हकीकत यह है कि बीजेपी के राज में तेल के इस खेल में आमजन सबसे ज्यादा लुटा है। सरकार ने अकेले तेल के खेल में 27 लाख करोड़ रुपए कमाए हैं। तेल के कारण हर चीज की महंगाई सातवें आसमान पर पहुंची है। आम जनता की जेब पर तेल के इस खेल ने मोदी राज में सबसे ज्यादा डाका डाला है।

राणा ने कहा कि चुनावों के एकदम बाद करीब एक रुपए रोज प्रति लीटर तेल की कीमतें बढ़ाकर बीजेपी ने जनता को महंगाई का मीठा जहर धीरे-धीरे दिया है और अब दानवीर बनते हुए यह प्रचारित किया जाने लगा है कि बीजेपी ने तेल का रेट 9.50 रुपए कम करके देश की जनता पर बहुत बड़ा एहसान किया है जबकि हकीकत यह है कि बढ़े हुए रेट के मुकाबले अभी भी तेल के रेट का लेवल पिछले 2 महीनों की अपेक्षा ज्यादा है। राणा ने कहा कि तेल के इस खेल को आम जनता को समझना जरूरी है। 2014 से पहले यूपीए के राज में एक्साइज ड्यूटी पैट्रोल पर 9 रुपए 48 पैसे व डीजल पर 3 रुपए व 56 पैसे हुआ करती थी लेकिन मोदी राज में तेल के नाम पर मची लूट में एक्साइज ड्यूटी को लगातार बढ़ाकर पैट्रोल पर 27 रुपए 90 पैसे व डीजल पर 21 रुपए 90 पैसे तक पहुंचा दिया गया। बीजेपी सरकार आंकड़ों के मायाजाल में उलझाकर रेट कमी को बड़ी उपलब्धि बताकर ढिंढोरा पीटने लगी है।

राणा ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी के नाम पर वसूले गए 27 लाख करोड़ रुपए सरकारी खजाने के नहीं हैं बल्कि यह पैसा आमजन की जेब से गया है। उन्होंने कहा कि मोटे तौर पर इसे यूं समझा जाए कि एक रुपए की एक्साइज ड्यूटी कम होने पर 59 पैसे के करीब केंद्र सरकार का हिस्सा बनता है जबकि 41 पैसे के करीब राज्य सरकार का हिस्सा बनता है, ऐसे में सैंट्रल एक्साइज ड्यूटी कम होने पर स्वत: ही राज्यों को 41 पैसे कम करने होंगे जबकि स्पैशल एडिशनल सैस का करीब 68 फीसदी हिस्सा अभी भी केंद्र के हिस्से में ही रहता है। 

राणा ने कहा कि अभी तक हल्ला यह मचाया जाता था कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल महंगा होने के कारण तेल पर महंगाई बढ़ रही है जबकि वास्तविकता यह है कि भारी-भरकम टैक्स के माध्यम से सरकार ने आम आदमी की जेब पर डाका मारने की खुली छूट पैट्रोल कंपनियों को दे रखी थी और आम आदमी की जेब को भी सरकार ने अपनी आमदनी का जरिया बना रखा है। उन्होंने कहा कि अभी भी करीब 9:50 रुपए सैंट्रल एक्साइज घटाने के बाद सरकार 19 रुपए प्रति लीटर के करीब एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। राणा ने कहा कि डीजल-पैट्रोल के रेट कम करने का यह नाटक भी सरकार ने जनता के आक्रोश व कांग्रेस के दबाव को देखते हुए किया है। लेकिन अगर बीजेपी सरकार के पुराने रवैये का अध्ययन किया जाए तो यह निश्चित है कि चुनाव होने के तुरंत बाद सरकार फिर डीजल-पैट्रोल के दामों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर फिर खुली लूट शुरू कर देगी।

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