Himachal: नियमों की अनदेखी पर प्रदूषण बोर्ड की बड़ी कार्रवाई, स्टोन क्रशर की बिजली काटने के आदेश

Edited By Vijay, Updated: 03 Oct, 2026 11:09 AM

order to cut the electricity of the stone crusher

हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बोर्ड ने जिला सोलन के अर्की स्थित एक स्टोन क्रशर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी विद्युत आपूर्ति काटने के...

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बोर्ड ने जिला सोलन के अर्की स्थित एक स्टोन क्रशर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी विद्युत आपूर्ति काटने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम-1974 की धारा 33-ए और वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम-1981 की धारा 31-ए के तहत अमल में लाई गई है।

बिना वैध सहमति के चल रहा था संचालन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, यह स्टोन क्रशर बिना अनिवार्य सहमति के संचालित किया जा रहा था। बोर्ड के अधिकारियों ने 21 अगस्त, 2026 को इस यूनिट का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि क्रशर को दी गई पूर्व सहमति 17 दिसम्बर, 2023 को ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद प्रबंधन ने नई अनुमति प्राप्त किए बिना ही अवैध रूप से क्रशर का संचालन जारी रखा।

प्रदूषण नियंत्रण के तय मानकों की उड़ी धज्जियां
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि यूनिट में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। क्रशर में प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी पर्याप्त क्षमता वाले नोजल के साथ वाटर स्प्रिंकलर मौजूद नहीं थे। साथ ही, बैग फिल्टर के बाद साइक्लोन वाला ड्राई एक्सट्रैक्शन सिस्टम भी नहीं लगाया गया था। इसके अलावा, कन्वेयर बेल्ट की भी पूरी तरह से कवरिंग नहीं की गई थी।

परिसर में नहीं मिली जरूरी बुनियादी सुविधाएं
धूल नियंत्रण को लेकर क्रशर प्रबंधन की भारी लापरवाही सामने आई। क्रशर की परिधि में अनिवार्य रूप से बनाई जाने वाली 3 फुट ऊंची विंड ब्रेकिंग दीवार मौके पर नहीं मिली। परिसर में न तो पक्की (मैटल्ड या कंक्रीट) सड़कें थीं और न ही धूल को उड़ने से रोकने के लिए रोटेटिंग वाटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम, फॉगर या एंटी स्मॉग गन की कोई व्यवस्था की गई थी। निगरानी के लिए अनिवार्य पीटीजैड कैमरे भी परिसर से नदारद पाए गए।

बार-बार नोटिस के बावजूद नहीं हुआ सुधार
इन गंभीर खामियों को देखते हुए परवाणू के क्षेत्रीय अधिकारी ने 24 अगस्त, 2026 को क्रशर प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। प्रबंधन को 2 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यूनिट ने इसका पालन नहीं किया। बोर्ड के मुताबिक, इससे पहले भी क्रशर को कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। लगातार निर्देशों की अनदेखी करने और बिना वैध अनुमति के क्रशर चलाते रहने के कारण ही अंततः बोर्ड को बिजली काटने का सख्त आदेश जारी करना पड़ा है।

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