हिमाचल के एंट्री टैक्स के खिलाफ निहंगों का बड़ा एक्शन, पंजाब सीमा पर वाहनों को रोककर वसूला 'खालसा राज टैक्स'

Edited By Vijay, Updated: 03 Jun, 2026 05:38 PM

nihangs collected khalsa raj tax at the border against himachal s entry tax

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में लगाए गए कमर्शियल एंट्री टैक्स का विवाद अब और गहरा गया है। हिमाचल के इस फैसले के विरोध में मंगलवार-बुधवार को कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर निहंग सिंह संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए खालसा राज...

नालागढ़ (सतविन्द्र): हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में लगाए गए कमर्शियल एंट्री टैक्स का विवाद अब और गहरा गया है। हिमाचल के इस फैसले के विरोध में मंगलवार-बुधवार को कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर निहंग सिंह संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए खालसा राज टैक्स अभियान शुरू कर दिया। गरामोड़ा टोल प्लाजा के पास निहंगों ने हिमाचल से पंजाब में प्रवेश करने वाले वाहनों को रोककर प्रतीकात्मक टैक्स वसूला। इस बड़े एक्शन के बाद सीमा पर तनाव और गहमागहमी का माहौल बन गया। बाबा अच्छर सिंह महाकाल की अगुवाई में बुधवार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक यह खालसा राज टैक्स अभियान चलाया गया। इस दौरान हिमाचल की ओर से पंजाब में आने वाले वाहनों को रोककर प्रतीकात्मक पर्चियां काटी गईं। यह टैक्स फिक्स नहीं था, वाहन चालकों ने अपनी श्रद्धा अनुसार 10, 20, 50 या 100 रुपए की सहयोग राशि दी। निहंग संगठनों ने स्पष्ट किया कि इस टैक्स से एकत्रित राशि को समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्गों में वितरित किया जाएगा।

1 जून को ही दे दी थी चेतावनी
गौरतलब है कि बीते 1 जून को ही किसान संगठनों, टैक्सी यूनियनों, स्थानीय निवासियों और निहंग संगठनों ने एंट्री टैक्स के विरोध में 4 घंटे का चक्का जाम किया था। उसी दिन यह चेतावनी दे दी गई थी कि यदि हिमाचल सरकार ने अपना टैक्स वापस नहीं लिया, तो पंजाब सीमा पर भी खालसा राज टैक्स वसूलना शुरू कर दिया जाएगा।

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किसान नेताओं और पुलिस ने संभाला मोर्चा
बॉर्डर पर स्थिति को संभालने के लिए पंजाब मोर्चा के कन्वीनर गौरव राणा, किरती किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीर सिंह बड़वा और औरत किसान यूनियन बहिराम के जिला प्रधान अवतार सिंह मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही थाना प्रभारी राहुल शर्मा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। पुलिस प्रशासन ने अपनी सूझबूझ से सभी पक्षों से बातचीत कर कानून-व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया।

संघर्ष नेता बोले-स्थिति के लिए पंजाब सरकार की कमजोर पैरवी जिम्मेदार
मौके पर पहुंचे संघर्ष नेताओं ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री और विधायकों की कमजोर पैरवी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपने लोगों के हितों की रक्षा करती, तो जनता को ऐसे कदम नहीं उठाने पड़ते। नेताओं ने निहंग संगठनों की जनहित भावना की सराहना की, लेकिन साथ ही अपील की कि वे फिलहाल इस अभियान को रोक दें, ताकि प्रशासन के लिए कोई चुनौती खड़ी न हो और सम्मानित निहंग संगठनों पर कोई उंगली न उठा सके।

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पंजाब सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम
किसान नेताओं और पुलिस की अपील पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए निहंग संगठनों ने फिलहाल अभियान को विराम दे दिया है। हालांकि, निहंग नेता बाबा अच्छर सिंह महाकाल ने पंजाब सरकार को 10 दिन का सख्त अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पंजाब सरकार 10 दिनों के भीतर हिमाचल को 'जैसे को तैसा' जवाब देते हुए समान (रेसिप्रोकल) टैक्स लगाने की घोषणा करे या संगठनों के साथ बैठक कर अपना रुख साफ करे। अगर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो बॉर्डर पर मजबूरन स्थायी मोर्चा लगा दिया जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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