Edited By Swati Sharma, Updated: 28 Aug, 2026 11:37 AM

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति में सरकार को निर्णायक भूमिका देने वाले प्रावधानों को रद्द कर दिया है। अदालत ने हिमाचल प्रदेश कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी (संशोधन) अधिनियम, 2023 और इसके तहत 2026 में...
Shimla News : हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति में सरकार को निर्णायक भूमिका देने वाले प्रावधानों को रद्द कर दिया है। अदालत ने हिमाचल प्रदेश कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी (संशोधन) अधिनियम, 2023 और इसके तहत 2026 में बनाए गए नियमों को ''असंवैधानिक और आरंभ से ही अमान्य'' घोषित कर दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि कुलपति की नियुक्ति से जुड़े प्रावधान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विनियम, 2018 के सीधे तौर पर खिलाफ थे। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह भी कहा कि इस अधिनियम में 2025 में किया गया संशोधन ''असंवैधानिक'' था और दोनों विश्वविद्यालयों--पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और सोलन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति के लिए यूजीसी के नियमों के तहत नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।
अदालत ने नरेंद्र कुमार सांख्यन और संजीव कुमार चौहान की ओर से दायर रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए ये निर्देश जारी किए। इन याचिकाओं में दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति के लिए बदली गई चयन प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।
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