हिमाचल में शहद उत्पादकों के नुकसान की रिपोर्ट बनाने के निर्देश, विधायक ने हर संभव सहायता का दिया आश्वासन

Edited By Swati Sharma, Updated: 12 Sep, 2026 09:44 AM

kangra instructions issued to prepare report on losses suffer by honey producers

हिमाचल प्रदेश में शाहपुर विधायक एवं सदन में उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने अधिकारियों को ‘स्मॉल हाइव बीटल' नामक कीट के कारण शहद उत्पादकों को हुए नुकसान की विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

Kangra News : हिमाचल प्रदेश में शाहपुर विधायक एवं सदन में उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने अधिकारियों को ‘स्मॉल हाइव बीटल' नामक कीट के कारण शहद उत्पादकों को हुए नुकसान की विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रभावितों को राहत प्रदान करने का मामला मुख्यमंत्री और उद्यान मंत्री के समक्ष उठाया जा सके।

नुकसान का जायजा लेने के निर्देश

यहां मिनी सचिवालय में शुक्रवार को उद्यान विभाग द्वारा आयोजित एक जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने शाहपुर के एसडीएम को संबंधित पंचायतों के पटवारियों के जरिए नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दिए। मधुमक्खी पालकों ने पठानिया का आभार व्यक्त करते हुए अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी शहद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और ‘मुख्यमंत्री शहद विकास योजना' के तहत पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराने की मांग सरकार के समक्ष उठाने का आग्रह किया। पठानिया ने कहा कि मधुमक्खी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक मुख्य जरिया है और कांगड़ा के शहद ने पूरे देश में पहचान बनाई है।

29 पंजीकृत मधुमक्खी पालकों की सोसाइटी बनाने का दिया सुझाव

पठानिया ने शाहपुर के 29 पंजीकृत मधुमक्खी पालकों की एक सोसाइटी बनाने का सुझाव दिया और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. कमलशील नेगी ने बताया कि उत्तरी क्षेत्र में अब तक विभिन्न स्थानों पर 14 जागरूकता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने सूचित किया कि स्मॉल हाइव बीटल कीट के कारण कांगड़ा जिले में मधुमक्खी पालकों को औसतन 32 प्रतिशत और शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 40 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालकों की सहायता के लिए जिले में एक‘बी-कीपिंग सेल'भी स्थापित किया गया है। शिविर में विशेषज्ञों डॉ. सुरेंदर और डॉ. निशा ने इस कीट के प्रभाव तथा मधुमक्खियों व छत्तों के बचाव के उपायों की जानकारी दी। 

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