खैर कटान में बड़ा खेल? नूरपुर में डिपो की बजाय कही ओर डंप हो रही लकड़ी, कई स्टंप पर हैमर मार्क तक नहीं

Edited By Swati Sharma, Updated: 05 Sep, 2026 01:56 PM

kangra  wood being dumped elsewhere instead of the depot in nurpur

हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड, वन कार्य मंडल धर्मशाला की सहायक प्रबंधक वन कार्य इकाई नूरपुर के अंतर्गत चल रहे लॉट नंबर 23/2025-26 में खैर के पेड़ों के कटान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Nurpur (दुर्गेश कटोच) : हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड, वन कार्य मंडल धर्मशाला की सहायक प्रबंधक वन कार्य इकाई नूरपुर के अंतर्गत चल रहे लॉट नंबर 23/2025-26 में खैर के पेड़ों के कटान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नूरपुर वन रेंज की थोड़ा भलूनं बीट में चल रहे इस कटान के दौरान काटी गई खैर की लकड़ी को निर्धारित वृंदावन डिपो में पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर डंप करके रखने का मामला सामने आया है। काटकर रखी गई उक्त लकड़ी को 4 सितंबर को वहां से उठाकर वृंदावन डिपो के लिए भेजा गया। सवाल यह है कि आखिर डिपो में भेजी जाने वाली खैर की लकड़ी को पहले निजी परिसर में डंप करने की जरूरत क्यों पड़ी? लकड़ी को मौके से सीधे निर्धारित डिपो में क्यों नहीं पहुंचाया गया?

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क्यारी क्षेत्र में भी कटान, मौके पर नहीं दिखे निगम के अधिकारी

इसी बीट के क्यारी क्षेत्र में भी 3 सितंबर को खैर के पेड़ों का कटान किया गया। जिसमें भी  काटे गए खैर के मोछों को भी तत्काल डिपो में भेजने के बजाय मौके पर ही डंप करके रखा गया था। 3 सितंबर को क्यारी गांव में सिर्फ लेबर और वन मित्र मौजूद मिला। मौके पर निगम विभाग का कोई अधिकारी मौजूद नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने महत्वपूर्ण वन कार्य और खैर जैसी बेशकीमती लकड़ी के कटान के दौरान संबंधित विभागीय अधिकारी मौके पर क्यों नहीं थे? क्या कटान और लकड़ी की निगरानी महज लेबर और वन मित्र के भरोसे छोड़ी गई थी?

कई स्टंप पर हैमर मार्क नहीं

4 सितम्बर को जब दोबारा मौके की स्थिति ने सबसे बड़ा सवाल कटे हुए पेड़ों के स्टंप और खैर के मोछों की पहचान को लेकर खड़ा किया है। मौके पर कई काटे गए स्टंप पर हैमर मार्क दिखाई नहीं दिए, जबकि काटे गए खैर के मोछों पर भी प्रॉपर्टी मार्क नहीं मिलने की बात सामने आई है। वन विभाग और निगम के नियमों के तहत काटी गई लकड़ी की पहचान और रिकॉर्डिंग बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि मौके पर वास्तव में कटे हुए पेड़ों के स्टंप पर आवश्यक हैमर मार्क और लकड़ी पर प्रॉपर्टी मार्क नहीं पाए गए, तो इसकी जांच होना बेहद जरूरी है।

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जानें वन प्रबंधक नूरपुर इकाई में कार्यरत नरेंद्र शर्मा क्या कहा

मामले को लेकर जब कॉरपोरेशन विभाग में कार्यरत नरेंद्र शर्मा से लॉट नंबर 23/2025-26 में चल रहे कार्य के संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने मीडिया के सामने बयान देने के लिए अधिकृत नहीं होने की बात कही। वहीं, वन इकाई नूरपुर के अधिकारी ज्ञान चंद से जब प्रॉपर्टी मार्क के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि हैमर मार्क,  प्रॉपर्टी मार्क का न होना अवैध कटान की ओर इशारा करता है। यह बयान मामले को और गंभीर बना देता है। हालांकि जब ज्ञान चंद जी को मौके पर आकर स्थिति देखने का आग्रह किया तो उन्होंने बताया कि वह 4 सितंबर को छुट्टी पर हैं।

जांच से ही साफ होगी स्थिति

अब सवाल यह है कि लॉट नंबर 23/2025-26 में खैर कटान के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं। लकड़ी को डिपो भेजने से पहले दूसरी जगह डंप करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, कई स्टंप पर हैमर मार्क क्यों नहीं दिखाई दिए और लकड़ी पर प्रॉपर्टी मार्क की स्थिति क्या रही—इन सभी बिंदुओं की जांच की जरूरत है। मामले में विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है या पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही की गई है।

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