Edited By Swati Sharma, Updated: 05 Sep, 2026 10:17 AM

Shimla News : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) के CEO-सह-सचिव के तौर पर सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लागू सेवा नियमों के तहत वे इस पद के लिए योग्य नहीं थे।
Shimla News : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) के CEO-सह-सचिव के तौर पर सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लागू सेवा नियमों के तहत वे इस पद के लिए योग्य नहीं थे।
जस्टिस ज्योत्सना रेवाल दुआ ने HIMUDA में सीनियर चीफ इंजीनियर अंजोरी कपूर की याचिका को मंज़ूरी देते हुए यह आदेश पारित किया। कपूर ने वशिष्ठ के पद को अपग्रेड करने और उसके बाद CEO-सह-सचिव के तौर पर उनकी नियुक्ति को चुनौती दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे लागू भर्ती और पदोन्नति नियमों के अनुसार इस पद के लिए नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करें और सक्षम अधिकारियों को दो हफ़्ते के भीतर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक बुलाने का आदेश दिया। कपूर, जिन्हें दिसंबर 2022 में चीफ़ इंजीनियर के पद पर पदोन्नत किया गया था, ने सरकार के फरवरी 2023 के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी जिसके तहत वशिष्ठ के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर पद को "व्यक्तिगत उपाय" के तौर पर चीफ़ इंजीनियर के पद में अपग्रेड किया गया था।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि मई 2025 में CEO-सह-सचिव के तौर पर वशिष्ठ की नियुक्ति 2012 के R&P नियमों के खिलाफ थी, क्योंकि उनके पास शीर्ष पद पर विचार किए जाने के लिए जरूरी चीफ़ इंजीनियर का कोई वास्तविक और नियमित पद नहीं था। याचिका पर सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने एक चीफ़ इंजीनियर पद का नाम बदलकर एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रैटेजी) कर दिया और कपूर को उस पद पर नियुक्त कर दिया, जबकि वशिष्ठ CEO-सह-सचिव बने रहे। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी पद को केवल "व्यक्तिगत उपाय" के तौर पर अपग्रेड करने से लागू सेवा नियमों के तहत कोई नया नियमित कैडर पद नहीं बन सकता। अदालत ने कहा कि वशिष्ठ का चीफ इंजीनियर के पद पर प्रमोशन "संयोगवश" हुआ था और इसलिए, वे CEO-सह-सेक्रेटरी के पद पर आगे प्रमोशन के लिए योग्य नहीं थे। अदालत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एग्जीक्यूटिव ऑर्डर, कानूनी सर्विस नियमों से ऊपर नहीं हो सकते और कैडर में कोई भी बदलाव या नए पद बनाने का काम तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
अदालत ने 27 मई, 2025 की उस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया, जिसके जरिए वशिष्ठ को CEO-सह-सेक्रेटरी और कपूर को एडवाइज़र (पॉलिसी और स्ट्रैटेजी) नियुक्त किया गया था। अदालत ने यह भी माना कि इस पद पर नियुक्ति के लिए निष्पक्ष विचार किए जाने का कपूर का अधिकार, जो संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत सुरक्षित है, प्रभावित हुआ था। हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया कि CEO-सह-सेक्रेटरी के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान वशिष्ठ को जो भी आर्थिक लाभ मिले हैं, उनकी उनसे वसूली नहीं की जानी चाहिए। अब राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे लागू सर्विस नियमों के अनुसार, कपूर सहित योग्य उम्मीदवारों के बीच से नई चयन प्रक्रिया शुरू करें।
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