उपभोक्ता आयोग का फैसला, पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस कंपनी को 2.10 लाख रुपए का बीमा दावा चुकाने के आदेश

Edited By Swati Sharma, Updated: 29 Sep, 2026 03:33 PM

dharamshala  insurance company ordered to pay insurance claim of 2 10 lakh

Dharamshala News : जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कांगड़ा स्थित धर्मशाला ने जीवन बीमा से जुड़े मामले में पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस कम्पनी को सुमंगला देवी को 2.10 लाख रुपए की बीमा राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं।

Dharamshala News : जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कांगड़ा स्थित धर्मशाला ने जीवन बीमा से जुड़े मामले में पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस कम्पनी को सुमंगला देवी को 2.10 लाख रुपए की बीमा राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं।

आयोग ने 30 दिन की वेटिंग अवधि का हवाला देकर बीमा दावा खारिज करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। कंपनी को 10 हजार रुपए मानसिक परेशानी व उत्पीड़न तथा 10 हजार रुपए मुकद्दमा खर्च भी देना होगा। मामले के अनुसार सुमंगला देवी के पति स्वर्गीय रमेश कुमार ने 19 दिसम्बर 2020 को पीएनबी गग्गल शाखा से 2.10 लाख रुपए का व्यक्तिगत ऋण लिया था। इसी दौरान पीएनबी मेटलाइफ की लोन एंड लाइफ सुरक्षा समूह बीमा पॉलिसी के लिए 9,417 रुपए प्रीमियम और 1,436 रुपए टैक्स खाते से काटा गया। बीमा कवरेज 20 दिसंबर 2020 से 2.10 लाख रुपए की बीमित राशि के साथ शुरू हुआ था। रमेश कुमार की 8 जनवरी 2021 को मृत्यु हो गई।

मृत्यु के बाद सुमंगला देवी ने बीमा दावा किया, लेकिन कंपनी ने 30 दिन की वेटिंग अवधि का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान कंपनी को मूल प्रस्ताव फॉर्म और बीमा की शर्तें बीमित व्यक्ति को उपलब्ध कराए जाने का प्रमाण पेश करने के निर्देश दिए। कई अवसर मिलने के बावजूद कंपनी मूल प्रस्ताव फॉर्म और बीमा शर्तों की डिलीवरी से संबंधित प्रमाण पेश नहीं कर सकी। आयोग ने कहा कि जब बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि 30 दिन की वेटिंग अवधि वाली शर्त बीमित व्यक्ति को उपलब्ध करवाई गई थी, तो इस शर्त के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता।

आयोग ने आवेदन फॉर्म और पॉलिसी शैड्‌यूल में नाम को लेकर भी विसंगति पाई। आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य अर्ति सूद और नारा नारायण ठाकुर की पीठ ने शिकायत मंजूर करते हुए बीमा कंपनी को 2.10 लाख रुपए 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने के निर्देश दिए। साथ ही 10 हजार रुपए मानसिक परेशानी व उत्पीड़न और 10 हजार रुपए मुकद्दमा खर्च देने का आदेश दिया।

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