Kangra: शुक्रवार से शुरू होकर 9 दिनों तक चलेगा गोगा जी का गुणगान हर गांव हर कस्बे में सुनाई जाएगी जाहरवीर की गाथा

Edited By Kuldeep, Updated: 27 Aug, 2026 09:15 PM

dadasiba sulah goga ji saga

प्रदेश के अंदर गोगा जी के जगह-जगह मंदिर स्थापित हैं तथा गोगा जी के प्रति लोगों की सदियों से चली आ रही अगाध श्रद्धा और विश्वास आज भी उसी तरह से कायम है।

डाडासीबा/सुलह (सुनील/ब्यूरो): प्रदेश के अंदर गोगा जी के जगह-जगह मंदिर स्थापित हैं तथा गोगा जी के प्रति लोगों की सदियों से चली आ रही अगाध श्रद्धा और विश्वास आज भी उसी तरह से कायम है। आज से गोगा जी के नवरात्र शुरू होंगे जोकि 9 दिनों तक लगातार चलेंगे। मान्यता है कि गोगा जी महाराज सालभर में सिर्फ 9 दिनों के लिए ही अपने भक्तजनों को दर्शन देते हैं और 9 दिनों के बाद पुनः साल भर के लिए पाताल लोक में अंतर्ध्यान हो जाते हैं। गोगाजी का गुणगान करने के लिए गोगा मंडलियां घर-घर जाकर गोगा जाहरवीर की वीर गाथाओं का गुणगान करती हैं। सैंकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद आज भी गांवों के अंदर प्राचीन परंपरा अनुसार गोगा वीर के जन्म, विवाह तथा लड़ाई के प्रसंग घर-घर जाकर सुनाए जाते हैं।

गोगा मंडलियों के साथ चलने वाले 9 दिनों तक जमीन पर सोते हैं तथा विधिपूर्वक गोगा जी का पूजन करते हैं। लोग श्रद्धा के अनुसार गोगा मंडलियों को अनाज के रूप में गेहूं तथा आटे के अलावा गोगा जी के नाम पर दक्षिणा प्रदान करते हैं। उसके उपरांत गोगा जी के भक्त 9 दिनों के बाद गोगा जी के नाम पर अपने-अपने क्षेत्रों में विशाल भंडारों का आयोजन करते हैं तथा रात को गोगा नवमी में गोगा जी का भजन कीर्तन देखने को मिलता है। गोगा नवमी की रात को गोगा जी के मंदिरों में चेलों के खेलने की परंपरा चली आ रही है और सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी तरह कायम है।

गोगा जी के भक्तजनों का मानना है कि इन 9 दिनों के अंदर जो भी कोई भक्त सच्चे मन से गोगा जी के मंदिर में अरदास करता है, वह अरदास अवश्य पूरी होती है। विशेष कर पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए की गई अरदास को गोगा जी महाराज पूर्ण करते हैं इस तरह के कई किस्से गोगा महापुराण में पढ़ने को मिलते हैं। गोगा जी को यह वरदान गोरखनाथ जी से मिला था। गोगा जी को गुरु गोरखनाथ का परम शिष्य माना जाता है। कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति उनके भक्तों को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित करने का कार्य करता है तो गोगा जी महाराज उसे अपने हिसाब से दंडित करते हैं।

कोई उन्हें भगवान विष्णु तो कोई उन्हें शेषनाग का अवतार मानते हैं लेकिन गोगा जी की कथा बेहद रोचक और अनंत है। गोगा मंडलियां घर-घर जाकर उनकी गाथाओं का गुणगान करती हैं तथा लोग बड़े ही चाव के साथ गोगा जाहरवीर के विभिन्न प्रसंगों को सुनते हैं। गोगा जी का विशेष छत्र मंडलियों के साथ-साथ चलता। मान्यता है कि इस छत्र में स्वयं गोगा जी विराजमान रहते हैं तथा जो कोई इस छत्र की सच्चे मन से आराधना करता है। गोगा जाहरवीर उसकी हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

 

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