Chamba: इंजैक्शन लगते ही थम गई डेढ़ साल की मासूम की सांसें! मेडिकल कॉलेज में मौत मामले की रिपोर्ट तैयार

Edited By Vijay, Updated: 13 Sep, 2026 02:58 PM

child girl death case in medical college

पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चम्बा में डेढ़ वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में जांच लगभग पूरी हो गई है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है।

चम्बा (काकू): पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चम्बा में डेढ़ वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में जांच लगभग पूरी हो गई है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। अब सोमवार को इस रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

3 दिन का था समय, रिपोर्ट तैयार करने में लगा एक हफ्ता
मासूम की मौत के बाद परिजनों के हंगामे और मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी को महज तीन दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इस प्रक्रिया में एक हफ्ते का समय लग गया। अब रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह तय माना जा रहा है कि प्रबंधन इस पर कड़ा संज्ञान लेगा।

क्या था पूरा मामला? 
गौरतलब है कि बीते 6 सितम्बर को चुराह उपमंडल की सेईकोठी पंचायत के गांव नरवाड़ निवासी कुलदीप सिंह अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी कृतिका को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज चम्बा लाए थे। बच्ची की छाती जाम थी और उसमें खून की कमी के लक्षण थे। पिता कुलदीप सिंह के अनुसार, वे शाम करीब 4 बजे बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन एमरजेंसी के बावजूद बच्ची को तुरंत वार्ड में दाखिल नहीं किया गया। दाखिल करने के बाद उन्हें एक्स-रे करवाने के लिए भेजा गया, लेकिन वहां कोई भी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं मिला। इसके बाद डॉक्टरों ने दो अन्य टैस्ट करवाने के लिए लिख दिया, जिसके लिए तीमारदारों को बाहर निजी लैब के चक्कर काटने पड़े।

45 मिनट तक तड़पती रही बच्ची, नहीं आया कोई डॉक्टर
परिजनों का गंभीर आरोप है कि बच्ची करीब पौने घंटे तक तड़पती रही, लेकिन इस दौरान कोई भी डॉक्टर उसकी सुध लेने नहीं पहुंचा। बच्ची के दम तोड़ने से महज 15 मिनट पहले एक डॉक्टर वहां पहुंचे। आरोप है कि चिकित्सक द्वारा बच्ची को एक इंजैक्शन लगाया गया और भाप दी गई। इसके तुरंत बाद बच्ची पूरी तरह अचेत हो गई और उसने दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था। उनका कहना था कि अगर समय रहते बच्ची का इलाज शुरू हो जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।

क्या है अस्पताल प्रबंधन का पक्ष?
इस पूरे मामले पर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार है। कमेटी द्वारा पेश किए गए तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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