Edited By Swati Sharma, Updated: 23 Aug, 2026 12:20 PM

कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और इरादों में चट्टान सी मजबूती हो, तो राह के हर रोड़े और पहाड़ जैसी बड़ी चुनौतियां भी बौनी साबित हो जाती हैं। इस बात को एक बार फिर सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के दुर्गम चुराह क्षेत्र के युवा राजेश ठाकुर ने।
Chamba News : कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और इरादों में चट्टान सी मजबूती हो, तो राह के हर रोड़े और पहाड़ जैसी बड़ी चुनौतियां भी बौनी साबित हो जाती हैं। इस बात को एक बार फिर सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के दुर्गम चुराह क्षेत्र के युवा राजेश ठाकुर ने। संसाधनों की भारी कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से जूझते हुए राजेश ने अपनी अटूट मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। उन्होंने थाईलैंड में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
थाईलैंड के चियांग माई में 20 से 22 अगस्त 2026 तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में दुनिया भर के कई देशों के दिग्गज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से प्रतियोगिता में उतरे राजेश कुमार ने 130+ किलोग्राम भार वर्ग में अपनी ताकत और तकनीकी कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण जीता। प्रतियोगिता के लिए जारी एथलीट प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने इस भारी-भरकम वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए तिरंगे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऊंचा किया। सुदूर पहाड़ी इलाके से निकलकर विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल करना न सिर्फ राजेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का पल है। अपनी इस सफलता के बाद भी राजेश रुकने वाले नहीं हैं। अपनी इस कामयाबी के बारे में बात करते हुए वे पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि उनका अंतिम और बड़ा लक्ष्य देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाना है। उनका मानना है कि अगर कड़ी मेहनत और सही दिशा में मार्गदर्शन मिले, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
संघर्षों से भरी जीवन यात्रा
चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत जस्सोरगढ़ के गांव पट्टी के रहने वाले राजेश ठाकुर का यहाँ तक का सफर कतई आसान नहीं रहा है। उनके संघर्ष की कहानी हर उस युवा के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देता है। राजेश ने चंडीगढ़ से अपने खेल और हुनर को पेशेवर रूप से तराशना शुरू किया और अपनी मेहनत के दम पर राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता के कई झंडे गाड़े।
तीन बार राष्ट्रीय चेम्पियन
राजेश ठाकुर लगातार तीन बार राष्ट्रीय चैंपियन रहने का गौरव हासिल कर चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने अपने नाम 'स्ट्रांग मैन इंडिया' का प्रतिष्ठित खिताब किया। इससे पूर्व भी उनका चयन श्रीलंका में आयोजित विश्व स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ था, लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण वे वहां हिस्सा नहीं ले पाए थे। उस असफलता या रुकावट से टूटने के बजाय राजेश ने दोगुनी ताकत से वापसी की और थाईलैंड में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
युवाओं के लिए बने प्रेरणास्त्रोत, नशे के खिलाफ कड़ा संदेश
राजेश ठाकुर आज केवल एक बेहतरीन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि चुराह और चंबा के युवाओं के लिए एक सच्चे आदर्श बन चुके हैं। आज के समय में क्षेत्र के युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की है। राजेश का स्पष्ट मानना है कि खेल युवाओं को एक सही और सकारात्मक मार्ग दिखाते हैं। खेलों में भाग लेना न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि यह जीवन को अनुशासन और सही दिशा भी देता है। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि प्रतिभा किसी महानगर या महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि इसके लिए केवल अटूट दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।
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