नूरपुर : अकिल बख्शी ने किए भ्रष्टाचार होने के दावे, मांगा डडवाल-मनहास का इस्तीफा

Edited By Swati Sharma, Updated: 08 Sep, 2026 05:33 PM

aqil bakhshi launches a scathing attack over alleged corruption in nurpur

जिला कांगड़ा की नूरपुर विधानसभा में राजनीतिक माहौल उस समय गर्मा गया जब पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकिल बख्शी ने मंगलवार एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर कई गंभीर...

जसूर (राहुल राणा) : जिला कांगड़ा की नूरपुर विधानसभा में राजनीतिक माहौल उस समय गर्मा गया जब पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकिल बख्शी ने मंगलवार एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। अकिल बख्शी ने कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष संदेश डडवाल तथा कांग्रेस ब्लॉक महासचिव तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों पर जनता और संगठन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपते हैं, यदि उन्हीं पर सरकारी धन और संसाधनों के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हों तो इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। बख्शी ने इनपर 13-13 लाख में दुकानें बेचने के आरोप भी लगाए, साथ ही इस्तीफा की मांग की।

पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन को लेकर गंभीर आरोप

अकिल बख्शी ने जसूर में बनी पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ दुकानें संदेश डडवाल और उनके करीबी लोगों से जुड़ी हुई हैं तथा दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दुकानों को बेहद कम किराये पर प्राप्त करने के बाद उन्हें आगे मोटी रकम लेकर सबलेट करने का प्रयास किया गया, जबकि ऐसी व्यवस्था नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है। बख्शी ने कहा, ''यदि सरकारी संपत्ति को कम किराये पर लेकर आगे निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया है, तो यह केवल नियमों का मामला नहीं बल्कि सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान पहुंचाने का गंभीर विषय है।''

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“ब्लॉक की दुकानों को अपनी संपत्ति बताकर 13-13 लाख रुपये में बेचने की कोशिश"

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष संदेश डडवाल के साथ कांग्रेस जिला महासचिव तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास पर भी अकिल बख्शी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ब्लॉक की दुकानों को कथित रूप से अपनी दुकानें बताकर आगे लगभग 13-13 लाख रुपये में बेचने की कोशिश की गई। बख्शी ने कहा कि इस संबंध में दो व्यक्तियों द्वारा उन्हें लिखित रूप में शिकायत/बयान दिए गए हैं, जिन्हें उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अथवा पंचायत समिति की संपत्ति को निजी संपत्ति की तरह बेचने या हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसकी उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मनरेगा में पत्नी की दिहाड़ी लगवाने के आरोप

अकिल बख्शी ने आरोप लगाया कि संदेश डडवाल के पंचायत प्रतिनिधि रहते हुए उनकी पत्नी की मनरेगा में दिहाड़ियां लगाई गईं। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उस समय के मस्टर रोल उनके पास मौजूद हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड मीडिया के समक्ष दिखाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संदेश डडवाल द्वारा अपने परिवार को विभिन्न माध्यमों से लाभ पहुंचाया गया। बख्शी के अनुसार, ''उनकी पत्नी के मनरेगा में कार्य करने के साथ-साथ परिवार से जुड़े लोगों को पंचायत में वेंडर/सप्लायर के रूप में भी लाभ मिलने का मामला सामने आता है।'' अकिल बख्शी ने सवाल उठाया कि यदि पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं और खरीद प्रक्रिया का लाभ बार-बार एक ही परिवार अथवा करीबी लोगों तक पहुंचता रहा है, तो क्या इसकी निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए?

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सरकार को नुकसान और अपनों को फायदा, किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल?

अकिल बख्शी ने कहा कि इन आरोपों से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पूछा कि यदि कांग्रेस संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों पर ही सरकारी योजनाओं और संपत्तियों से जुड़े गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, तो फिर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के “व्यवस्था परिवर्तन” के दावे का क्या अर्थ रह जाता है? उन्होंने कहा, ''सरकार और प्रशासन को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना इन मामलों की जांच करवानी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।''
“जांच पूरी होने तक नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें” अकिल बख्शी ने संदेश डडवाल और तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जिन लोगों पर इस प्रकार के गंभीर आरोप लग रहे हों, उन्हें महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होना चाहिए।

आरोप इतने गंभीर हैं तो आखिर इन लोगों को संरक्षण कौन दे रहा है?

अकिल बख्शी ने मांग रखी कि मनरेगा के मस्टर रोल, पंचायत की वेंडर सूची, संबंधित बिल-वाउचर, पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन रिकॉर्ड, किराया रिकॉर्ड, आवंटन प्रक्रिया तथा दुकानों के कथित सबलेट/हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। उन्होंने कहा, ''यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं, बल्कि सरकारी धन, सरकारी संपत्ति और जनता के अधिकारों से जुड़ा मामला है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। यदि लगाए  यदि आरोप सही हैं तो सरकार एवं प्रशासन दोषियों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कठोर कार्रवाई करे।''

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