'PGIMER की तर्ज पर विकसित हो टांडा मेडिकल कॉलेज', अनुराग शर्मा ने JP नड्डा से की मांग

Edited By Swati Sharma, Updated: 14 Aug, 2026 02:18 PM

anurag sharma met jp nadda to further improve tanda medical college

राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा को और बेहतर करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की।

कांगड़ा (राहुल राणा) : राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा को और बेहतर करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की।  उन्होंने केंद्र सरकार के अधीन PGIMER चंडीगढ़ की तर्ज पर स्वायत्त दर्जा देने और यहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

एडवांस ट्रॉमा सेंटर बनाने की रखी मांग

अनुराग शर्मा ने नड्डा के समक्ष डॉ. आरपीजीएमसी टांडा में एडवांस ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की मांग रखी ताकि न्यूरोसर्जरी, हड्डियों के इलाज, वैस्कुलर सर्जरी, गंभीर मरीजों की देखभाल और रिहैबिलिटेशन जैसी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकें। साथ ही सड़क हादसों और अन्य गंभीर मामलों में मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा। वहीं गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत भी कम होगी। अनुराग ने कहा, ''मुझे प्रसन्नता है कि माननीय मंत्री जी का सकारात्मक रुख रहा और उन्होंने इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर आवश्यक विचार एवं सहयोग का आश्वासन दिया। टांडा को अत्याधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं से सशक्त बनाना, प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और गंभीर मरीजों के दूसरे राज्यों में रेफरल को कम करना हमारी प्राथमिकता है।''

संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की मांग

इसके अलावा डॉ. आरपीजीएमसी टांडा की मौजूदा सुविधाओं, मरीजों की संख्या और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इसे हिमाचल प्रदेश और पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की भी मांग अनुराग शर्मा ने रखी। इसके लिए मेडिकल शिक्षा, रिसर्च, एडवांस मरीज देखभाल और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गईृ।

दूसरे राज्यों में रेफर होने वाले मरीजों को मिलेगा फायदा

अनुराग द्वारा नड्डा को दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, अगर टांडा मेडिकल कॉलेज में आधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं विकसित होती हैं तो हिमाचल के मरीजों को इलाज के लिए पंजाब, चंडीगढ़ और अन्य पड़ोसी राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी। इससे मरीजों और उनके परिवारों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। प्रस्ताव में इन योजनाओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई जल्द शुरू करने का अनुरोध किया गया है। इसमें कहा गया है कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों और स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए यह कदम जनहित में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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