PICS: 6 महीने राशन को भी तरस जाएंगे 2 लाख लोग अगर...

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Sunday, November 13, 2016-3:08 PM

कुल्लू (मनमिंदर अरोड़ा): हिमाचल प्रदेश के जनजातीय इलाकों में रहने वाले करीब 2 लाख लोगों को इस बार राशन के लिए भी तरसना पड़ सकता है। बर्फबारी की वजह से कबायली इलाके 6 महीने तक मुख्यधारा से कट जाते हैं। ऐसे में यहां रहने वाले लोग बर्फ पड़ने से पहले अपने राशन और दूसरी चीजों का इंतजाम करते हैं। लेकिन नोटबंदी के फैसले के बाद यहां के लोगों की मुश्किल बढ़ गई है।


बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है लेकिन अभी तक इन इलाकों में पर्याप्त मात्रा में बैंक नकदी पहुंचाने में नाकाम रहे हैं। लोगों को अपना जरूरी सामान खरीदने के लिए पैसे कम पड़ रहे हैं और उन्हें चिंता अगले 6 महीने की है, जब बर्फ की दीवार बीच में खड़ी हो जाएगी। ऐसे में बैंकों के सामने लाहुल-स्पीति, किन्नौर और चंबा के जनजातीय इलाकों में नई करेंसी पहुंचाना बड़ी चुनौती है।


कुल्लू में पी.एन.बी. के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर माना कि दिक्कत तो है। उन्होंने पंजाब केसरी को बताया कि नई करेंसी इन इलाकों में पंहुचाने की कोशिश जारी है। चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि यहां आबादी बिखरी हुई है। 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 42.5 प्रतिशत कबायली क्षेत्रों के तहत आता है। इसमें दो जिले किन्नौर, लाहुल-स्पीति और चंबा जिला के दो विकास खंड पांगी और भरमौर आते हैं। यह इलाका बड़ा है लेकिन यहां आबादी प्रदेश का कुल 2.53 प्रतिशत ही है। 


जनजातीय इलाके का बड़ा हिस्सा मंडी लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है। इस समस्या  को देखते हुए मंडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने शनिवार को बैंक अधिकारियों के साथ बैठक भी की। उन्होंने बताया कि मंडी संसदीय क्षेत्र के जनजातीय इलाकों में बर्फबारी होने वाली है और ऐसे में वहां पर पहले से धन पहुंचना जरूरी है।

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