क्या कुटलैहड़ में कांग्रेस और चिंतपूर्णी में भाजपा तोड़ पाएगी तिलिस्म?

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Friday, December 8, 2017-12:35 AM

ऊना: क्या इस बार के विधानसभा चुनावों में कुटलैहड़ और चिंतपूर्णी का तिलिस्म टूटेगा या फिर जीत के लिए पाॢटयां रणनीति बदलेंगी? हालांकि इसका उत्तर 18 दिसम्बर की मतगणना में मिलेगा लेकिन उससे पहले जीत हार के आंकड़ों को लेकर दावे प्रतिदावे हो रहे हैं। कुटलैहड़ क्षेत्र जिला ऊना का एकमात्र ऐसा हलका है जहां कांगे्रस पार्टी वर्ष 1985 के बाद कोई चुनाव नहीं जीत पाई है। वर्ष 1985 में पंडित राम नाथ शर्मा कांगे्रस टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक और फिर विधानसभा उपाध्यक्ष बने थे। इसके बाद जितने भी चुनाव हुए उनमें कांग्रेस पार्टी को हार का सामना ही करना पड़ा है। 

27 वर्षों के बाद विवेक शर्मा लड़ रहे कांग्रेस टिकट पर चुनाव
27 वर्षों के बाद कुटलैहड़ हलके से इस बार पंडित राम नाथ शर्मा के पुत्र एवं कांगे्रस के प्रदेश सचिव विवेक शर्मा कुटलैहड़ से कांगे्रस टिकट पर भाग्य आजमाने उतरे हैं। क्या भाजपा का मजबूत किला कांगे्रस ध्वस्त कर पाएगी या फिर भाजपा यहां से चुनाव जीत कर अपने अभेदय किल्ले को सलामत रख पाने का नया इतिहास रचेगी? कुटलैहड़ की तरफ सबकी नजरें अटकी हुई हैं। वर्ष 1990 में कुटलैहड़ से भाजपा के गठबंधन के साथ जनता दल के ठाकुर रणजीत सिंह विधायक बने थे। उसके बाद वर्ष 1993 में हुए चुनावों से लेकर वर्ष 2012 के बीच हुए सभी चुनावों में भाजपा ही जीतती रही है।

भाजपा की तरफ से वीरेन्द्र कंवर चौथी बार लड़ रहे चुनाव
वीरेन्द्र कंवर भाजपा की तरफ से तीसरी बार कुटलैहड़ के विधायक हैं और चौथी बार विधायक बनने के लिए इस बार मैदान मे हैं। पिछले 27 वर्षों के कांगे्रस के वनवास को क्या कांगे्रस के विवेक शर्मा खत्म कर पाएंगे या फिर वीरेन्द्र कंवर चौथी बार विजयी होकर कांगे्रस को बड़ा आघात पहुंचाएंगे, यह सवाल प्रमुख बना हुआ है। इंतजार अब नतीजों का है कि आखिर किसकी होगी जीत और कौन रचेगा इतिहास?

चिंतपूर्णी में पिछले 3 विस चुनावों से पराजय का सामना कर रही भाजपा
इसी तरह चिंतपूर्णी हलके की ओर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। भाजपा चिंतपूर्णी क्षेत्र में पिछले 3 विधानसभा चुनावों से पराजय का सामना कर रही है। यहां से राकेश कालिया कांगे्रस के 2 बार विधायक रह चुके हैं। रिर्जव होने के बाद यहां से पिछले विस चुनावों 2012 में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांगे्रस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप कुमार विजयी हुए थे। जीत दर्ज करने के बाद कुलदीप कुमार को वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। अब कुलदीप कुमार फिर से चुनाव मैदान में हैं। कुलदीप कुमार कांगे्रस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं। चिंतपूर्णी से विधायक कुलदीप कुमार इससे पहले गगरेट में भी लगातार 3 बार विधायक रहे चुके हैं। इस बार उनका फिर मुकाबला भाजपा के बलबीर सिंह से है। दोनों के बीच यह चौथा चुनाव मुकाबला है।

अनारक्षित होने के बाद चिंतपूर्णी हलके में होना पड़ा शिफ्ट
कुलदीप कुमार और बलबीर सिंह पहले गगरेट आरक्षित से चुनाव लड़ते थे लेकिन क्षेत्र के अनारक्षित होने के बाद उन्हें चिंतपूर्णी हलके में शिफ्ट होना पड़ा था। दोनों के बीच अब एक बार फिर दिलचस्प मुकाबला है। पिछले विस चुनावों में बलबीर सिंह करीब 400 मतों से पराजित हुए थे। देखना होगा कि क्या कुलदीप कुमार कांगे्रस के इस गढ़ को बचाकर 5वीं बार विधायक बन विस में पहुंचते हैं या फिर बलबीर सिंह इस क्षेत्र को कांगे्रस के हाथों से छीन कर यहां भगवा लहराने में कामयाब रहते हैं? चिंतपूर्णी हलके में वर्ष 1990 और 1998 को छोड़ भाजपा को सफलता नहीं मिल पाई है। क्या यहां कांगे्रस का किला मजबूत रहता है या फिर भाजपा इसमें सेंध लगाएगी इस पर हर कोई नजरें लगाए हुए है। इन दोनों हलकों पर ही जीत-हार को लेकर दोनों दलों के अलग-अलग आंकड़े हैं और दावे-प्रति दावे किए जा रहे हैं। 

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