अनोखी परंपरा : यहां नरबलि के बदले एक-दूसरे को मारे जाते हैं पत्थर

  • अनोखी परंपरा : यहां नरबलि के बदले एक-दूसरे को मारे जाते हैं पत्थर
You Are HereShimla
Saturday, October 21, 2017-12:21 AM

धामी: सैंकड़ों लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थरों की बरसात कर दी, लगभग आधे घंटे तक यह पथराव बदस्तूर जारी रहा और दर्शक इस पथराव का आनंद उठाते रहे। यह दृश्य ग्राम पंचायत हलोग धामी के खेल का चौरा गांव में हर साल दीपावली के अगले दिन देखने को मिलता है। दरअसल यह सब एक परम्परा के तहत होता है जिसमें पत्थर से घायल किसी आदमी का रक्त माता काली को चढ़ाकर प्रथा को पूर्ण किया जाता है।
PunjabKesari
माता काली को मानव बलि चढ़ाने का था रिवाज
दंतकथा के अनुसार हजारों साल पहले यहां पर माता काली को मानव बलि चढ़ाने का रिवाज था। कालांतर में जब एक राजा की मृत्यु के बाद उनकी रानी सती हुई तो उस सती ने इस प्रथा को बदल डाला। नई प्रथा में धामी रियासत के समुदायों को 2 टोलियों में बांट दिया गया, जिसमें से एक टोली में जमोगी तथा दूसरी टोली में कटेडु, धगोई तथा तुनडु समुदाय के लोग आते हैं। यह दोनों टोलियां एक निश्चित स्थान से एक-दूसरे पर पत्थर से हमला करती हंै और फिर जिस भी पहले आदमी को पत्थर लगता है उसका खून काली माता को चढ़ाकर प्रथा को पूर्ण किया जाता है। 
PunjabKesari
मानव रक्त चढ़ाकर पूरी होती है बलि प्रथा
गौरतलब है कि इस परम्परा में किसी भी जानवर का रक्त नहीं चढ़ाया जाता बल्कि मानव रक्त चढ़ाकर संकेतात्मक रूप से बलि प्रथा पूरी की जाती है। इस अवसर पर मेले का आयोजन भी किया जाता है जिसे पत्थरों का मेला कहा जाता है। आज यह मेला अंतर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित कर चुका है और देश के अलावा विदेशी भी इस अनोखे मेले को देखने के लिए आते हैं।
PunjabKesari
जमोगी टोली के प्रकाश चंद को लगा पत्थर
इस बार का पत्थर जमोगी टोली के गोरी गांव के प्रकाश चंद को लगा। प्रकाश चंद का रक्त माता काली को चढ़ाया गया। इससे पहले राजपरिवार के जगदीप सिंह और राजपुरोहित देवेंद्र कुमार ने पूजन करके मेले की शुरूआत की। इसके बाद दोनों टोलियां एक-दूसरे पर पत्थराव करती रहीं। जैसे ही प्रकाश को पत्थर लगा वैसे ही झंडा लहराकर पथराव को रोक दिया गया।

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!