Watch Video: इस चमत्कारी झील के पानी पर तैरता है अरबों का खजाना, जानिए क्या है राज

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Monday, July 3, 2017-4:15 PM

सुंदरनगर (नितेश सैनी): दुनिया का सबसे बड़ा खजाना, जिसे न किसी बैंक में रखा गया है न किसी तजोरी में, इसकी कोई पहरेदारी भी नहीं होती। लेकिन यहां से आज तक एक पाई भी चोरी नहीं हुई। आपको यह जानकर हैरानी जरूर होगी कि ये खजाना एक झील में है। हम आपको बता रहे हैं यह खजाना भारत में ही है। यह हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के कमरूघाटी में है। कमरूनाग का मंदिर और उसके साथ है यह झील। इसमें अरबों का खजाना दबा हुआ है। इस झील तक पहुंचने के लिए मंडी जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर रोहांडा तक पैदल ही जाना पड़ता है। यह 8 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई वाला रास्ता है। लेकिन प्रकृति की खूबसूरती इस कठिन चढ़ाई की थकान मिटा देती है।
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झील के पानी पर तैरते नोट अरबों के खजाने की दे रहे गवाही
समुद्रतल से 3 हजार 334 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है कमरूनाग का मंदिर। कमरू देवता घाटी के सबसे बड़े देवता है। 14 जून से यहां एक सप्ताह का मेला भी लगता है और हजारों की सख्या में श्रद्धालु देवता के दर्शन करने के लिए आते हैं। कमरूनाग का मंदिर पहाड़ी शैली का एक नमूना है और इसके साथ है वो झील, जहां है अरबों का खजाना। इसमें सोना, सिक्के और पैसे हैं। लेकिन इसमें कितना खजाना है इसका आज तक कोई आंकलन नहीं लगा सका है। इस बात से कोई इंतराज नहीं करता कि इसमें अरबों का खजाना पड़ा हुआ है। झील के पानी पर तैरते नोट इस बात की गवाही दे रहे हैं। इस खजाने का इतिहास और इस मंदिर की कहानी को जानना बहुत जरुरी है। लेकिन मन में सवाल उठता है कि कुछ चढ़ाव मंदिर में और कुछ झील में क्यों चढ़ाया जाता है।
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यहां सोने-चांदी के गहने चढ़ाने की है परंपरा
आमतौर पर मंदिरो में चढ़ावा चढ़ाया जाता है और वह धनी होते जाते हैं लेकिन कमरूनाग के मंदिर में पैसों की कोई चमक ही नहीं है। इस मंदिर में मांगी गई हर मन्नत जरूर पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु कुछ चढ़ावा मंदिर में और कुछ झील में फैंकते है। यहां सोने-चांदी के गहने चढ़ाने की परंपरा है। उसी के रूप में श्रद्धालु यहां सोने, चांदी और रुपए चढ़ाते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है। कोई नहीं जनता झील में कितना सोना और चांदी है। कोई ये भी नहीं जानता कि झील की गहराई कितनी है। क्योंकि आज तक झील में कोई नहीं उतरा, क्योंकि धर्म और आस्था का मामला है। तभी झील में उतरने की आज तक किसी ने हिम्मत नहीं की। कुछ लोगों का दावा है कि ये झील पाताल लोक से जुडी हुई है। इस झील के खजाने का राज तो साफ हो गया लेकिन अब मन में सवाल उठता है कि अरबों के इस खजाने की सुरक्षा क्यों नहीं होती, क्या कभी चोरों ने इसे चुराने की कोशिश नहीं की। खासकर सर्दियों में बर्फ गिरने के बाद यहां कोई नहीं रहता।

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वर्ष में 5 महीने बर्फ से ढकी रहती है कमरूघाटी
यहां साल में करीब 5 महीने बर्फ पड़ती है तो यहां कोई नहीं रहता और मंदिर का हर द्वार बंद रहता है। बताया जाता है कि कुछ समय पहले खबर आई थी कि चोरों ने बर्फ खोदकर खजाने को चुराने की कोशिश की और जैसे ही चोर खजाना चुरा मंदिर के गेट के बाहर पहुंचे तो उन की आंखो की रोशनी चली गई। जब चोरों ने झील की तरफ फिर से मुड़कर देखा तो उसकी आंखों में रोशनी वापिस आ गई। उसके बाद चोर ने चुराया हुआ सामान फिर से झील में फैंक दिया। लोगों का कहना है कि यहां चोरी की वारदात कभी नहीं हुई। देवता के गुर नीलमणी के अनुसार महाभारत के समय से देवता यहां पर स्थापित है। उन्होंने कहा कि कृष्ण भगवान ने देवता को अपना विष्णु रूप दिया है। इस लिए कमरूघाटी जगह के नाम से देवता का नाम कमरुनाग के रूप रखा गया था। उन्होंने कहा कि मंदिर के साथ लगाती झील को पांडवों द्वारा बनाया गया है। यहां देवता से मांगी मनोकामना पूरी होने पर लोग झील में मान्यता के आधार पर पैसे फैंकते हैं।
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यहां हर मनोकामना होती है पूरी
उन्होंने कहा कि झील की गहराई का कोई आकलन नहीं लगा सकता। ये सिर्फ देवता की जानते होंगे। स्थानीय निवासी भारत भूषण का कहना है कि मैं यहां पर एक छोटी सी दुकान चलाता हूं, हम यह पर साल के अप्रैल महीने से यहां पर आते हैं और अक्टूबर तक यही रहते हैं। इस धार्मिक स्थल पर बहुत से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर पहुंचे हिमाचल के बिलासपुर जिला के एक श्रद्धालु से जब हमारे सवांदाता नितेश सैनी ने बात की तो उन्होंने कहा कि देवता के प्रति भक्तों को आस्था बहुत अनोखी है। देवता से जो भी मांगा जाता है उसकी मनोकामना वह जरूर पूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि आज से 15 साल पहले मैंने भी देवता से बेटा मांगा था और मेरा बेटा हुआ, तभी से वह यहां हर साल परिवार के साथ देवता का आशीर्वाद लेने आते हैं।  
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